अंबाला सिटी। गर्भ के समय में बिना परामर्श के दवा लेने बच्चे के कानों की सेहत को भी बिगाड़ सकता है। अधिकतर मामलों में देखने को मिला है कि माता के बिना विशेषज्ञ की सलाह से दवा खाने के कारण बच्चें के शरीर में कोई न कोई कमी हो जाती है। बहरापन भी उनमें से एक है। यह समस्या 14 वर्ष तक के बच्चों में अधिक रहती है। खसरा और गल घोटु भी इसका एक मुख्य कारण है। इसी को लेकर स्वास्थ्य विभाग द्वारा विशेष सप्ताह के तहत विश्व बधिर दिवस मनाया जा रहा है। जिसमें शिविर लगाकर लोगों को कान के स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया जाएगा।
एक सप्ताह तक चलेगा अभियान
यह विशेष सप्ताह 23 सितंबर से शुरू होकर 29 सितंबर तक जारी रहेगा। इसमें प्रत्येक स्वास्थ्य केंद्र और नागरिक अस्पताल में जांच शिविर लगाए जांएगे। जांच के बाद बच्चों और व्यस्कों को उपचार का परामर्श भी दिया जाएगा।
नियमित जांच जरूरी
सीएमओ डॉ राकेश सहल ने बताया कि भारत में एक लाख की आबादी पर 291 लोग ऐसे होते हैं जिन्हें सुनने में परेशानी होती है। ऐसे में जरूरी है कि अपने कानों की नियमित जांच करवाए। अगर समय पर समस्या का पता चल जाए तो उसका उपचार संभव होता है। अगर उपचार में देरी हो तो मरीज अपने सुनने की क्षमता भी गवा सकता है।
वर्जन
विभाग की ओर से एक सप्ताह का कानों की जांच के लिए शिविर लगाए जा रहे हैं। इस दौरान लोगों को उपचार करवाने के लिए भी परामर्श दिया जाएगा।
-डॉ. जशनप्रीत सिंह, नोडल अधिकारी टीकाकरण विभाग अंबाला