अंबाला सिटी। जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों पर पढ़ने वाले कुपोषित बच्चों को लेकर राहत भरी खबर है। जिले में बीते छह माह में 560 बच्चे गंभीर रूप से तीव्र कुपोषित यानि सैम की श्रेणी से बाहर आ गए हैं। यह केंद्र के द्वारा संचालित पोषण अभियान से हुआ। अप्रैल 2025 में जिले में कुल 674 बच्चे सैम श्रेणी में थे। सघन निगरानी और पोषण संबंधी हस्तक्षेप किया गया। इसके बाद जनवरी 2026 तक यह संख्या घटकर मात्र 114 रह गई है। महिला एवं बाल विकास विभाग आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों की लंबाई और वजन के हिसाब से कुपोषण का निर्णय लेता है। अब इन बच्चों को चिकित्सकीय जांच भी मिल सकेगी।
कुपोषित बच्चों को नहीं मिल रहा था चिकित्सकीय परामर्श
कुपोषित नौनिहालों के पोषण के लिए केंद्र सरकार पोषण अभियान चला रही है। इस योजना में कमी यह थी कि आंगनबाड़ी कुपोषित बच्चों को चिह्नित कर खुद ही पोषण से जुड़ी चीजें देती थीं। कोई बच्चा कुपोषित मिलता है तो उसकी चिकित्सकीय जांच होनी जरूरी है, तभी बच्चों के शरीर की कमियों को जानकर पोषण पर काम किया जा सकता है। हाल ही में दिशा की बैठक में जब यह कमी सामने आई तो सांसद वरुण चौधरी ने सीएमओ को निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि सभी कुपोषित बच्चों की केंद्र पर जांच हो। उन्हें चिकित्सक जो परामर्श दें उस आधार पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता उनके पोषण का ध्यान रखें।
पोषण अभियान के तहत दर्ज की गई प्रगति
- मद - विवरण प्रगति (संख्या)- प्रतिशत
- तकनीकी निगरानी- फेस रिकग्निशन सिस्टम- 24,873- 84.37
- पोषण (25 दिन)- निरंतरता- 35,428- 80.80
- विकास निगरानी- बच्चों की माप (0-6 वर्ष)- 62,110- 99.63
- गंभीर कुपोषण (सैम)- 0-5 वर्ष के बच्चे- 114- 0.22
- मध्यम कुपोषण- 0-5 वर्ष के बच्चे- 863- 1.67
- गंभीर ठिगनापन- 0-5 वर्ष के बच्चे- 1,160- 2.24
अंबाला छावनी में आंगनबाड़ी परिसर में खेलते बच्चे। संवाद