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Ambala News: अब खांसी की आवाज से होगी टीबी की पहचान, कफ अगेंस्ट एप बनेगी मददगार

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अंबाला। अब टीबी जैसी गंभीर बीमारी के खात्मे में एआई की मदद ली जाएगी। हरियाणा राज्य क्षय रोग कार्यालय के निर्देशानुसार जिले में कफ अगेंस्ट टीबी एप का विशेष प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। इस तकनीक की खासियत यह है कि अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई के जरिये मरीज की खांसी की आवाज सुनकर ही टीबी की प्रारंभिक पहचान की जा सकेगी। पीएचसी व सीएचसी स्तर पर भी इसका प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि टीबी का पता लगाकर जल्द से जल्द उसका उपचार किया जा सके।
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तकनीक से तेज व सटीक होगी पहचान
यह एप कृत्रिम बुद्धिमत्ता एआई की मदद से खांसी की आवाज का विश्लेषण करता है व उन विशिष्ट ध्वनियों की पहचान करता है जो टीबी से संभावित रूप से जुड़ी हो सकती है। एप मोबाइल फोन के माइक्रोफोन से खांसी रिकॉर्ड करता है और एआई एल्गोरिदम उसके ऑडियो सिग्नल का विश्लेषण कर टीबी मरीजों की पहचान में सहायता करता है, इससे फील्ड में काम करने वाले स्वास्थ्य कर्मियों को तुरंत संदिग्ध मरीजों को चिह्नित करने और आगे की जांच के लिए भेजने में मदद मिलेगी।

विगत माह चले निक्षय अभियान में मिले थे टीबी के 766 मरीज
निक्षय अभियान के तहत विगत माह 2025 में स्वास्थ्य विभाग की तरफ से 100 दिनों तक विशेष जांच अभियान चलाया गया था। 400 गांवों में लगे शिविर में मरीजों की जांच की गई थी। 100 दिनों में दो लाख दो हजार 64 लोगों की जांच की गई थी, इनमें से 766 नए टीबी मरीज पाए गए थे। ऐसे में हर साल जिला में टीबी के मरीजों की संख्या में इजाफा होता जा रहा है।
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वर्ष - नागरिक - निजी
2017 - 1776 - 313
2018 - 2099 - 322
2019 - 2614 - 379

टीबी की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से गंभीर है। कफ अगेंस्ट टीबी एप का प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि एआई तकनीक से खांसी की आवाज से टीबी की पहचान कर उसे दुरुस्त किया जा सके।
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- डॉ. राकेश सहल, सीएमओ अंबाला
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