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कोई नहीं बचेगा, सभी बाजारों में टूटेंगे कब्जे

Sat, 12 Apr 2014 11:59 PM IST
अमर उजाला, अंबाला
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अंबाला कैंट। हाईकोर्ट के आदेश में कैंट में सदर बाजार, बजाजा बाजार, कपड़ा मार्केट, हनुमान मार्केट व न्यू सदर बाजारों से पक्के कब्जे हटाने में प्रशासन सख्ती दिखा रहा है। वहीं एसकेएस बेदी ने हाईकोर्ट से सभी बाजारों के पक्के कब्जों को हटाए जाने की बात कही है। हाईकोर्ट ने नगर निगम को 23 मई को आगामी कार्रवाई के लिए वक्त दे दिया है। क्योंकि याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट को बताया है कि नगर निगम ने कब्जे हटाने का काम अभी शुरू किया है, खत्म नहीं। नगर निगम को कब्जे हटाने के लिए और वक्त मिलना चाहिए।
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कब्जे की होड़ ऐसी कि पीछे न रह जाएं


कपड़ा व हनुमान मार्केट: यह बाजारा पंद्रह से 20 फीट तक सड़क पर है। पुराना नाला गायब है। सड़क पर पक्के कब्जे हो गए हैं। प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की। दुकानदारों को खुद ही कहा कि तीन-तीन फीट कब्जे पीछे कर लो। इसके बाद अधिकारियों ने जेसीबी नहीं चलाई गई।

सदर व न्यू सदर बाजार: सदर व न्यू सदर बाजार में जेसीबी का कहर ‘जोर’ छोटे दुकानदारों पर खूब बरपा। लेकिन  बड़े-बड़े शोरूम और प्रभावशाली लोगों के पक्के कब्जों की पहली ‘दहलीज’ पर ही जेसीबी ‘नतमस्तक’ हो गई। इस बात को लेकर दुकानदारों में अधिक आक्रोश है।
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बजाजा बाजार: बजाजा बाजार में भी जेसीबी तो चली। लेकिन यहां भी प्रभावशाली लोगों के शोरूमों के पक्के कब्जों को गिराना प्रशासन के बूते की बात नहीं थी। लिहाजा नालों पर कब्जे जारी हैं।

सर्राफा व कसेरा बाजार:  इस बाजार में भी नालों पर पक्के कब्जे तो दूर खुद दुकानों को ही आगे तक बढ़ा लिया गया है। त्योहारों के दिनों में इस बाजार से गुजरना भी मुश्किल हो जाता है।

निकलसन रोड मार्केट: एक्साइज एरिया में होने के बावजूद मिलीभगत से बहुमंजिला शोरूमनुमा इमारतें खड़ी हो गई हैं, नाले और सरकारी जमीनें तो संगमरमर की पक्की सीढ़ियों से घिर चुकी हैं। नालों का तो कहीं पता ही नहीं है। जाम लगना यहां आम है।

राय मार्केट: यहां नालों पर दुकानें बन चुकी है, सड़कें भी दस से पंद्रह फीट तक पक्के कब्जों में तबदील है। सुबह से रात तक सामान बतौर ‘डिस्पले’ पड़ा रहता है। सड़कों पर शेड बनाकर पक्के कब्जे हो गए हैं।

गांधी मार्केट: यहां पूरी मार्केट ही सड़कों पर हैं। एक भी वाहन फंस गया, तो जाम। नगर निगम की सभी बाजारों की तरह इस मार्केट पर भी पूरी मेहरबानी है।

अनाज मंडी व दाल बाजार: कैंट का दाल बाजार व अनाज मंडी मार्केट में भी नालों पर कब्जे हैं। दुकानदारों ने नालों पर ही अपनी दुकानें आगे तक बढ़ा ली हैं। सड़कों तक पर दुकानदारों ने कब्जा कर लिया है।

पंसारी बाजार व गुड़ बाजार: दोनों बाजारों में नाले ढूंढने से नहीं मिलेंगे। नगर निगम की मिलीभगत से यहां भी अवैध कब्जे जारी हैं। लोगों को यहां से गुजरने में परेशानी होती है।

चौड़ा बाजार व सब्जी मंडी: अंग्रेजों के समय से मशहूर कैंट का यह चौड़ा बाजार इतना छोटा हो गया है कि लोगों को इसका नाम लेने में भी कई बार सोचना पड़ता है। दुकानदारों व शोरूम मालिकों ने नाले गायब कर दिए हैं। दस फीट तक सड़कों पर भी कब्जे हैं।

हलवाई बाजार व सौदागर बाजार: ये बाजार भी अंग्रेजों के वक्त के बाजार हैं। यहां दुकानदार एक-एक फीट करके आगे बढ़ते गए और आज पांच से पंद्रह फीट तक नालों व सड़कों को पक्के कब्जों में तबदील कर दिया है। कारोबारी सड़क पर बैठते हैं और पीछे दुकानों में सामान है।

कबाड़ी बाजार व राम बाजार रोड: राम बाजार रोड से पैदल गुजरना भी मुश्किल है। पूर्व डीसी केएम पांडुरंग के दौरे व चेतावनी के बावजूद कब्जे नहीं हटे। वहीं कबाड़ी बाजार में भी सड़कों व नालों पर पक्के कब्जे हैं।

बाजार डूबते हैं तो दुकानदार ही जिम्मेदार: बेदी
हाईकोर्ट में जनहित याचिका लगाने वाले एडवोकेट एसकेएस बेदी के अनुसार आज दुकानदार उन्हें भले ही कोस रहे हों, लेकिन अवैध कब्जे टूटने से आम लोगाें को राहत मिलेगी। किसी बाजार अगर कोई ग्राहक दुकान के आगे वाहन लगा तो कब्जाधारी उस पर टूट पड़ते हैं। बाजारों में जाम की समस्या यूं ही नहीं मसीबत बन गई है। निगम अफसरों की मिलीभगत से ऐसा हुआ है। आज नाले तो कहीं दिख ही नहीं रहे हैं, जब नाले ही नहीं है तो पानी की निकासी कहां से होगी। बारिश होती है, तो बाजार डूबते हैं। इसके लिए दुकानदार जिम्मेदार हैं, क्योंकि पानी की निकासी नहीं होगी तो दुकानों में पानी भरेगा। इसलिए हाईकोर्ट से बाजारों के नालों व सड़कों से पक्के कब्जे हटाने की गुहार लगाई है।
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