अंबाला सिटी। शहर की सड़कों और बाजारों में दौड़ रहे बेसहारा गोवंश बेसहारा नहीं हैं, बल्कि बेसहारा हमारा नगर निगम नजर आता है। इसका कारण गोवंशों की व्यवस्था नहीं करा पाना है। इसके अलावा साधन होने के बावजूद यह स्थिति है। या यूं कहें कि इस समस्या के लिए निगम गंभीर नहीं है।
बेसहारा गोवंश रोजाना सड़कों पर वाहनों के आगे आ जाते हैं और बाजारों में लोगों को घायल कर रहे हैं। निगम इन गोवंश को सुल्लर गोशाला में भी नहीं छोड़ रहा, जबकि गोशाला में गोवंश के लिए अभी पर्याप्त जगह हैं। पहले निगम ने गोवंश को पकड़ने के लिए अभियान भी चलाया था, मगर यह अभियान बीच में ही दम तोड़ गया। बीते सितंबर में निगम ने सुल्लर गोशाला में करीब 150 गोवंश छोड़े थे। इसके बाद निगम ने दोबारा अभियान नहीं चलाया। शहर के मानव चौक, नई अनाज मंडी के पास, बलदेव नगर, सेक्टर, रामबाग रोड और सौंडा रोड पर काफी बेसहारा गोवंश घूमते हैं।
गोशाला संचालक मांग चुके और गोवंश
सुल्लर में श्रीकृष्ण नंदी गोसेवा धाम प्रधान रणबीर सिंह ने बताया कि गोशाला में अभी करीब 238 पशु हैं। निगम ने बीते सितंबर में करीब 150 गोवंश गोशाला में छोड़े थे। उस दौरान निगम से अनुबंध था, तब से निगम गोशाला में हर महीने करीब डेढ़ लाख रुपये रखरखाव के दे रहा है। उन्होंने नगर निगम अधिकारियों को गोशाला में और पशु लेकर आने को कहा है। गोशाला में तुड़ी भी करीब साढ़े तीन हजार क्विंटल पहुंच गई है। गोवंश के लिए गोशाला में जगह खाली है।
नंदीशाला के लिए भी तैयार है बजट
चुनाव से पहले निगम अधिकारियों ने डंगडेहरी गांव में गोशाला बनाने के लिए निरीक्षण किया था। इसके लिए निगम ने निविदा कर दी है। करीब 2.50 करोड़ से गोशाला बनाई जानी है। चुनाव के बाद गोशाला बनाने के लिए आगामी प्रक्रिया शुरू होगी। इसके साथ ही नंदीशाला भी अलग से बनाई जाएगी। इसके लिए भी करीब 2.50 करोड़ का बजट रखा है। अभी नंदीशाला बनाने के लिए निविदा नहीं है। अभी निगम के पास अपनी गोशाला और नंदीशाला नहीं है।
बेसहारा गोवंश के मुद्दे पर किसान भी आक्रामक
बीते वर्ष किसानों ने दो बार प्रशासन को बेसहारा गोवंश के मुद्दे पर घेरा था। तब किसानों ने सुबह से देर रात तक गोवंश के साथ प्रदर्शन किया था। निगम ने तब इन गोवंश को सुल्लर गोशाला में छुड़वाया था। कुछ दिन तो निगम की ओर से गोवंश पकड़ने के लिए अभियान चलाया गया, लेकिन उसके बाद फिर स्थिति वैसे ही हो गई। अब फिर गोवंश सड़कों पर घूम रहे हैं। सुबह और शाम को तो स्थिति ज्यादा खराब होती है।
वर्जन
2.50 करोड़ से गोशाला बनाई जानी है। चुनाव के बाद गोशाला बनाने के लिए आगामी प्रक्रिया शुरू होगी। इसके साथ ही नंदीशाला भी अलग से बनाई जाएगी। इसके लिए भी करीब 2.50 करोड़ का बजट रखा है। अगर सुल्लर गोशाला में गोवंश छोड़ने के लिए जगह है तो अभियान चलाकर गोवंश को गोशाला में छुड़वाया जाएगा।
डॉ. संगीता तेतरवाल, आयुक्त, नगर निगम।