संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। सैन्य क्षेत्र की लगभग 199 एकड़ जमीन के स्थानांतरण पर सहमति नहीं बन पाई है। चंडीगढ़ मुख्यालय में बैठक के दौरान दोबारा से सर्वे करने का फैसला किया गया है जोकि रक्षा संपदा विभाग द्वारा किया जाएगा। इस संबंध में बीते शुक्रवार को बैठक में हरियाणा की तरफ से अतिरिक्त वित्त सचिव और रक्षा मंत्रालय के अधिकारी मौजूद रहे, हालांकि इससे पूर्व राज्य सरकार ने अंबाला छावनी के सेन्य क्षेत्र का सर्वे तैयार किया था और इसके आधार पर ही जमीन के अधिग्रहण की रुपरेखा तैयार की गई थी जोकि सिरे नहीं चढ़ पाई थी।
2018 से चल रही प्रक्रिया
अंबाला छावनी के तोपखाना परेड, दुधला मंडी, गुलाब मंडी व कालीपलटन पुल के पास के हिस्से के अधिग्रहण को लेकर वर्ष 2018 से प्रक्रिया चल रही है, लेकिन 9 साल बीत जाने के बाद भी यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई, हालांकि इस संबंध में पूर्व में कई बैठकें भी हो चुकी हैं। बावजूद इसके समस्या के स्थाई समाधान को लेकर न तो राज्य सरकार खाका तैयार कर पाई है और न ही सेना। इसलिए यह मामला आजतक लंबित है और इसका खामियाजा स्थानीय लोगों को भुगतना पड़ रहा है जोकि भूमालिक बनने की बाट जोह रहे हैं।
सेना ने मांगे थे 800 करोड़
तोपखाना परेड सहित अन्य जमीन को नगर परिषद में शामिल करने के लिए राज्य सरकार की तरफ से पुरजोर प्रयास किए गए। सर्वे के आधार पर सेना ने भूमि स्थानांतरण के लिए लगभग 800 करोड़ रुपये की राशि बनाई, हालांकि जब राज्य सरकार ने भूमि अधिग्रहण को लेकर अपना पक्ष रखा तो जमीन की कीमत लगभग 90 करोड़ रुपये आंकी गई जोकि सेना ने अमान्य करार दे दी और इसके बाद दोबारा मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
मुख्यमंत्री से लगाई थी गुहार
तोपखाना परेड सहित आसपास के क्षेत्रों से काफी संख्या में लागे अगस्त माह में दांडी यात्रा करते हुए हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी के आवास पर पहुंचे थे। यहां उन्हें स्थानीय निवासियों ने भूमि से संबंधित जानकारी देते हुए एक मांग पत्र सौंपा था। इसमें उन्होंने बताया कि था कि वह अंग्रेजों के जमाने से वर्ष 1962 से परेड की जमीन पर खेती कर रहे हैं और यहीं अब उन्होंने अपना घर बना लिया है, ऐसे में उन्हें यहां से निष्कासित न किया जाए और समस्या का समाधान करते हुए उन्हें भी भूमि का मालिक बनाने की प्रक्रिया आरंभ की जाए। मुख्यमंत्री के दखल के बाद ही अब यह बैठक वित्त सचिव और सेना के अधिकारियों के बीच हुई थी।
मामला रक्षा संपदा विभाग से जुड़ा हुआ है। इस संबंध में एक बैठक चंडीगढ़ मुख्यालय में हुई थी। बैठक में फैसला लिया गया है कि परेड सहित अन्य क्षेत्रों की जमीन का दोबारा से सर्वे किया जाए ताकि सही स्थिति का आकलन हो सके।
- राहुल आनंद शर्मा, सीईओ, कैंटोनमेंट बोर्ड, अंबाला।