संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। शिक्षा का अधिकार (आरटीई) के तहत आर्थिक रूप से कमजोर और विशेष बच्चों को निजी स्कूलों में दाखिला दिलाने का सरकारी दावा धरातल पर दम तोड़ता नजर आ रहा है। आरटीई पोर्टल के माध्यम से होने वाली प्रवेश प्रक्रिया में कैंट के दो प्रमुख स्कूलों की स्थिति इसका जीता-जागता प्रमाण है। हैरत की बात यह है कि इन स्कूलों में एक भी आवेदन नहीं पहुंचा है और शिक्षा विभाग ने बिना तथ्यों की जानकारी जुटाए और बिना नोटिस दिए विभागीय पोर्टल पर अस्थायी रूप से ब्लॉक कर दिया है।
केस 1-
विशेष स्कूलों के दरवाजे खुले, पर विभाग बेखबर
रोटरी क्लब डीफ एंड डंब स्कूल की प्राचार्य अमनदीप कौर ने स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि उनके स्कूल में विशेष बच्चों के लिए हमेशा दाखिले के दरवाजे खुले रहते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि न तो विभाग की ओर से उन्हें कोई औपचारिक जानकारी दी गई और न ही कोई नोटिस भेजा गया है। जबकि यह स्कूल डीफ एंड डंब बच्चों का विशेष स्कूल है। इस स्कूल में किसी को बिना दाखिले के वापस भेजने का सवाल ही पैदा नहीं होता।
केस 2-
सेवा समिति स्कूल में 4 सीटें अब भी खाली
वहीं, सेवा समिति स्कूल की प्राचार्य मंगला गुप्ता ने बताया कि आरटीई कोटे के तहत उनके स्कूल में 4 सीटें रिक्त हैं, लेकिन पोर्टल पर किसी ने आवेदन नहीं किया है। उन्होंने पिछले साल का वाकया याद करते हुए कहा कि बीते वर्ष दो बच्चों ने आवेदन किया था, जिन्हें स्कूल ने दाखिले की अनुमति भी दी, लेकिन दाखिला लेने कोई नहीं पहुंचा। ऐसे में उन्हें शिक्षा विभाग ने पोर्टल पर कैसे ब्लॉक किया है, ये उनके संज्ञान में नहीं है। अगर विभाग की तरफ से कोई नोटिस आता है तो उसका जरूर जवाब दिया जाएगा।
पड़ताल में सामने आई लापरवाही
मामले की जमीनी पड़ताल में जो तथ्य सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। न तो शिक्षा विभाग की ओर से स्कूलों को आरटीई पोर्टल की वर्तमान स्थिति से अवगत कराया गया और न ही आवेदन न आने के कारणों की समीक्षा की गई है।
शिक्षा विभाग द्वारा जारी सूची के अनुसार संबंधित स्कूलों को नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। वहीं स्कूलों से स्पष्टीकरण लिया जा रहा है।-सुधीर कालड़ा, जिला शिक्षाधिकारी