अंबाला। हरियाणा पंजाब की सीमा पर किसानों के आंदोलन के कारण 402 दिन शंभू टोल बंद रहा। इस कारण से भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को 297 करोड़ रुपये से अधिक के राजस्व का नुकसान हुआ है। टोल के बंद होने से हर दिन 74 लाख रुपये का नुकसान विभाग को उठाना पड़ा।
अब शुक्रवार को टोल को नए सिरे से शुरू कर दिया है। ऐसे में करोड़ों रुपये के राजस्व के नुकसान की भरपाई कैसे होती इस पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। चूंकि टोल को बंद राज्य सरकार की सहमति से स्थानीय एजेंसियों ने किया था, ऐसे में राज्य सरकार इन नुकसान की भरपाई एनएचएआई को करेगी या नहीं इस पर असमंजस की स्थिति है। गौरतलब है कि पिछले किसान आंदोलन में भी हरियाणा के कई टोल बंद रहे थे। इसके कारण एक हजार करोड़ रुपये से अधिक का एनएचएआई को नुकसान हुआ था। इस नुकसान की भरपाई भी आजतक नहीं हुई है।
पूर्व में एनएचएआई ने लिखा था पत्र
शंभू टोल बंद होने से 150 करोड़ रुपये तक नुकसान पहुंच गया था तभी एनएचएआई के स्थानीय अधिकारियों ने राज्य सरकार और अपने विभाग को पत्र लिखकर इस बाबत सूचित कर दिया था। मगर इस पत्र पर कोई आगामी कार्रवाई नहीं हुई। अब यह घाटा 297 करोड़ रुपये से भी अधिक हो गया है। ऐसे में एक तरफ केंद्र का विभाग है तो दूसरी तरफ राज्य सरकार सामने है। दोनों ही जगह भाजपा की सरकार है। हैरानी की बात तो यह है कि कहीं ऐसा न हो कि पिछले किसान आंदोलन की तरह इस बार के नुकसान को भी सरकार के कागजों में दफन कर दिया जाए।
अच्छे राजस्व वाला टोल है शंभू
हरियाणा पंजाब को जाेड़ने वाला शंभू टोल अंबाला लुधियाना राजमार्ग पर बना हुआ है। इस टोल से एनएचएआई को अच्छा राजस्व मिलता है। एक आकलन के अनुसार दिनभर में 74 लाख रुपये तो वीकेंड व त्योहार पर यहां राजस्व और भी बढ़ जाता है। जो कंपनी इस टोल पर जिम्मेदारी संभाल रही थी उसका एनएचएआई से जुलाई 2024 तक का करार था। इसके बाद अब एनएचएआई ने स्काईलार्क कंपनी को टोल संचालन की जिम्मेदारी दी है।
वर्जन
पूर्व में लिखे गए पत्र की जानकारी कर रहे हैं। यह राजस्व का नुकसान तो है। अब देखना होगा कि आगामी समय में क्या कदम उठाएं।
-गजेंद्र यादव, परियोजना अधिकारी, एनएचएआई