अंबाला। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को अंबाला शामली राजमार्ग परियोजना के निर्माण में देरी की चिंता सता रही है। इसकी चिंता का प्रमुख कारण राजमार्ग के निर्माण में मिट्टी की उपलब्धता में कमी होना है। यही कारण है कि एनएचएआई के चेयरमैन संतोष कुमार यादव ने इस बात हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी को डीओ लेटर लिखा है।
इसके माध्यम से हरियाणा सरकार से अनुरोध किया गया है कि टांगरी की तर्ज पर अंबाला के आसपास की नदियों से भी मिट्टी निकालने के लिए कुछ जल्द निर्णय लेना होगा। अन्यथा प्रधानमंत्री कार्यालय से निगरानी रखे जाने वाली इस परियोजना को तय समय में पूरा करना एक बड़ी चुनौती बन जाएगा।
इसके पीछे उन्होंने तर्क दिया है कि इस परियोजना को दिसंबर 2025 तक पूरा करना है। मिट्टी की पर्याप्त उपलब्धता न होने के कारण अब ठेकेदार कंपनियां काम को बंद करने की बात कह रही हैं। अब हरियाणा सरकार पीएमओ की निगरानी वाली इस परियोजना के लिए अन्य नदियों की खोदाई की योजना को सिरे चढ़ाती है यह देखने वाली बात होगी।
टांगरी की खोदाई की अनुमति के लिए जताया आभार
हरियाणा सरकार ने एनएचएआई की मांग पर कुछ समय पहले ही अंबाला में टांगरी नदी की खोदाई की अनुमति दी है। इस पर एनएचएआई के ठेकेदारों ने खोदाई का काम भी शुरू कर दिया है। इस पर चेयरमैन ने हरियाणा सरकार का आभार जताया है।
17 लाख घन मीटर अतिरिक्त मिट्टी की जरूरत
टांगरी नदी की खोदाई के फैसले से परियोजनाओं के लिए 10 लाख घन मीटर मिट्टी की निकासी संभव हुई है। इस मिट्टी का प्रयोग अंबाला रिंग रोड और शामली अंबाला एक्सेस कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड के लिए हो रहा है जबकि अंबाला शामली राजमार्ग परियोजना के लिए अभी 17 लाख घन मीटर अतिरिक्त मिट्टी की आवश्यकता है। ऐसे में एनएचएआई के चेयरमैन ने मुख्य सचिव से अपील की है कि अंबाला बाढ़ संभावित क्षेत्र है।
यहां निजी भूमि से मिट्टी की उपलब्धता काफी मुश्किल हो गई है। ऐसे में इस परियोजना के आसपास भी मारकंडा व अन्य नदियां आती हैं। जिनसे मिट्टी की जरूरत को पूरा किया जा सकता है। इस फैसले से अंबाला में आगामी समय में बाढ़ का खतरा भी कम किया जा सकता है। एनएचएआई इस मिट्टी या गाद को निकालने के लिए समझौता करने को भी तैयार है।
बरेली लुधियाना आर्थिक गलियारे का हिस्सा है अंबाला शामली राजमार्ग
इसी पत्र में बताया गया है कि अंबाला शामली परियोजना बरेली लुधियाना अार्थिक गलियारे का एक हिस्सा है। इसी कारण पीएमजी द्वारा नियमित रूप से परियोजना की निगरानी की जा रही है।