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Ambala News: नदी तल खनन पर एनजीटी का कड़ा रुख, खामियों पर नई सर्वे रिपोर्ट करनी पड़ी तैयार

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माई सिटी रिपोर्टर
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अंबाला सिटी। जिले में नदी तल खनन में पारदर्शिता लाने और पर्यावरण की रक्षा के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के कड़े निर्देशों के बाद जिला प्रशासन ने नई संशोधित जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट (डीएसआर) तैयार कर ली है।
साल 2022 की पिछली रिपोर्ट में खनन योग्य क्षेत्र और खनिजों की मात्रा को लेकर भारी विसंगतियां पाई गई थीं, जिसके बाद एनजीटी ने इसे संशोधित कर वैज्ञानिक पद्धति से दोबारा तैयार करने का आदेश दिया था। इस रिपोर्ट को जिला प्रशासन ने अपनी वेबसाइट पर सार्वजनिक किया है। इस पर लोग आपत्तियां या सुझाव 30 दिनों के भीतर अपने सुझाव या आपत्तियां माइनिंग कार्यालय या ऑनलाइन माध्यम से दर्ज करा सकते हैं।
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एनजीटी ने गठित की थी संयुक्त समिति : बलबीर संधू बनाम केंद्र सरकार मामले की सुनवाई के दौरान एनजीटी द्वारा गठित संयुक्त समिति, जिसमें केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और जिला मजिस्ट्रेट अंबाला शामिल थे। उन्होंने जांच में पाया कि पिछली रिपोर्ट में त्रिलोकपुर जैसी महत्वपूर्ण नदी पट्टियों को शामिल नहीं किया गया था। इसके अलावा, खनन योग्य खनिज भंडार के आंकड़ों में भी कई गलतियां थीं। खान एवं भू-विज्ञान विभाग ने अब नई रिपोर्ट में मारकंडा, टांगरी, बेगना, रून और सुकदो जैसी नदियों के वैज्ञानिक सर्वेक्षण पर जोर दिया है। खास बात यह है कि इस बार साल 2025 में अत्याधुनिक ड्रोन सर्वे और डीजीपीएस तकनीक का उपयोग कर खनिजों के पुनर्भरण का सटीक डेटा जुटाया गया है। प्रशासन का मानना है कि इस नई व्यवस्था से न केवल अवैध खनन पर प्रभावी लगाम लगेगी, बल्कि भूजल स्तर और जलीय पारिस्थितिकी तंत्र को भी सुरक्षित रखा जा सकेगा। अब जिले में खनन की अनुमति केवल इसी वैज्ञानिक रिपोर्ट और एनजीटी के दिशा-निर्देश के आधार पर दी जाएगी, जिससे राजस्व की चोरी रुकेगी और पर्यावरण संतुलन बना रहेगा।
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