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Ambala News: रेलवे कर्मचारियों के नवजातों को बिना उम्मीद कार्ड भी मिलेगा उपचार

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- बोर्ड ने जारी किए आदेश, ऑल इंडिया अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति रेलवे कर्मचारी एसोसिएशन ने उठाई थी मांग
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संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। रेलवे कर्मचारियों की ओर से मिल रही शिकायतों का बोर्ड ने समाधान किया है। इसके तहत अब रेल अस्पतालों में नवजात शिशुओं के उपचार के लिए यूनिक मेडिकल आइडेंटिटी कार्ड (उम्मीद) की अनिवार्यता आड़े नहीं आएगी। रेलवे बोर्ड ने निर्देश जारी किए हैं कि कार्ड न होने की स्थिति में किसी भी मासूम का उपचार नहीं रोका जाना चाहिए।
रेलवे बोर्ड के स्वास्थ्य निदेशक डॉ. आशुतोष गर्ग द्वारा जारी आदेशानुसार, अक्सर देखा गया है कि नवजात बच्चों का तत्काल उम्मीद कार्ड नहीं बन पाता, इससे उनके उपचार में बाधा आती थी। कर्मचारियों की तरफ से इस मुद्दे को उठाए जाने के बाद बोर्ड ने कड़ा रुख अपनाया है। बोर्ड ने सभी जोनल रेलवे के मुख्य चिकित्सा निदेशकों को निर्देश दिया है कि वे इस मामले में मानवीय दृष्टिकोण अपनाएं।
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एचएमआईएस प्रणाली में होगा तत्काल पंजीकरण
बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि अस्पताल प्रबंधन सूचना प्रणाली (एचएमआईएस) में अब ऐसे प्रावधान कर दिए गए हैं, जिससे नवजात शिशुओं के लिए तत्काल उम्मीद कार्ड बनाए जा सकें। बोर्ड ने यह भी निर्देश जारी किए हैं कि आपात स्थिति में केवल कार्ड न होने के आधार पर उपचार में देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। रेल कर्मचारियों को अपने नवजातों के उपचार के लिए अब दफ्तरों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं होगी। यह आदेश सभी रेलवे जोन, प्रोडक्शन यूनिट और आरडीएसओ पर तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
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एसोसिएशन ने फैसले का किया स्वागत
ऑल इंडिया अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति रेलवे कर्मचारी एसोसिएशन अंबाला मंडल के अध्यक्ष ओम प्रकाश मीना, सचिव पवन कुमार व कोषाध्यक्ष देवेंद्र कुमार ने रेलवे बोर्ड के इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि इसमें नवजात शिशुओं को बिना उम्मीद कार्ड के भी चिकित्सा सुविधा देने के निर्देश दिए गए हैं। एसोसिएशन लंबे समय से यह मांग उठा रही थी कि प्रशासनिक देरी के कारण शिशुओं के उपचार में बाधा न आए। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि आपात स्थिति में कार्ड के अभाव में इलाज नहीं रोका जाएगा।
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