रेलवे स्टेशन पर सेना के दो जवानों से मिली विस्फोटक सामग्री के मामले में सैन्य अफसरों की बड़ी लापरवाही सामने आई है। क्योंकि यदि ये विस्फोटक बठिंडा की छावनी में अभ्यास कार्य के लिए जाना था, तो बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि इस विस्फोटक को अंबाला छावनी से मंगवाने के लिए पूरी तरह से नियमों की पालना क्यों नहीं की गई। इस तरह की कुछ लापरवाही के चलते इस सामग्री को बठिंडा ले जाने वाले जवानों और डीलर की भूमिका दोनों संदेह के घेरे में है।
उधर, इस मामले में जीआरपी और आरपीएफ के अफसर इसलिए भी ज्यादा टेंशन में थे, क्योंकि दिल्ली पुलिस ने उन्हें इनपुट मिला था कि अंबाला कैंट के प्लेटफार्म नंबर तीन पर शाम सात बजे बम ब्लास्ट कर दिया जाएगा। इसलिए अफसर, जवानों और कमांडों की टीम के साथ शुक्रवार शाम से ही अंबाला कैंट स्टेशन को खंगाल रहे थे। इसी चेकिंग में स्टेशन से ही इस विस्फोटक के मिलने से आरपीएफ और जीआरपी के हाथ-पांव फूल गए और उन्होंने विस्फोटक ले जा रहे आर्मी के दो जवानों को हिरासत में लेकर कार्रवाई शुरू कर दी। शुक्रवार देर रात तक जवानों से पूछताछ और कार्रवाई जारी रही।
सेना बिठाएगी कोर्ट ऑफ इंक्वायरी
अंबाला में लोकल मिलिट्री अथारिटी ने इस बात को साफ कर दिया है इस मामले जो सामग्री पकड़ी गई है, उसका इस्तेमाल सैन्य अभ्यास के दौरान ही किया जाता है। अथॉरिटी का दावा है कि इस मामले में कोर्ट ऑफ इंक्वायरी भी बिठाई जाएगी, ताकि मालूम चल सके कि आखिरकार इस सामग्री को अंबाला से लेकर जाने के दौरान क्या अनियमितताएं बरती गई और इस मामले में किस स्तर पर लापरवाही बरती गई। इस मामले में सेना अपने स्तर पर जांच करेगी।
विस्फोटक की होगी फोरेंसिक जांच
विस्फोटक सामग्री को जीआरपी और आरपीएफ संदिग्ध बता रही है। हालांकि बम स्कॉवयड की टीम ने इसे सिलीकॉन ग्रेनाइट बताया है, लेकिन फिर भी इसकी जांच के लिए फोरेंसिक लैब में भेजा जाएगा। दूसरा चूंकि इस मामले कई अनियमितताएं भी सामने आ रही है, इसलिए जीआरपी इस मामले में जवानों और डीलर के खिलाफ कार्रवाई करेगी।
जीआरपी ने खड़े किए कई सवाल
जीआरपी के डीएसपी सुरेश कौशिक का कहना है कि विस्फोटक सामग्री लेने आए जवानों के पास अपनी बठिंडा स्थित यूनिट की ओर से इस सामग्री को अंबाला कैंट से ले जाने के लिए कोई अथॉरिटी लैटर या कमांड सर्टिफिकेट नहीं था। बिना कमांडिंग अफसर के अथारिटी लैटर के जवान कहीं से भी विस्फोटक कैसे खरीद सकते हैं, दूसरा जवान वर्दी में नहीं थे, ये भी नियम के विपरीत है। तीसरा, डीलर ने भी जवानों से बिना अथारिटी लैटर लिए विस्फोटक सामग्री कैसे दे दी? ऐसे तो कोई भी डीलर से विस्फोटक सामग्री खरीद सकता है। इस तरह की कई बातें सामने आ रही हैं, जो इस मामले को संदिग्ध बनाती हैं। इसलिए पूरी जांच के बाद जीआरपी जरूरी कार्रवाई करेगी। बिना अथारिटी लैटर के भी सैन्य अफसर यदि जवानों को इस तरह की सामग्री लेने के लिए भेजते हैं, तो निसंदेह इसमें कहीं न कहीं बड़ी लापरवाही दिख रही है।
जांच के बाद ही करेंगे बात : एसडीएम
उधर, मौके पर मौजूद एसडीएम अंबाला कैप्टन शक्ति सिंह का कहना है कि मामले में लापरवाही तो दिख रही है, लेकिन अभी जांच जारी है, उसके बाद ही कुछ कहा जाएगा।