अंबाला। अंबाला व नारायणगढ़ के न्यायालयों में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन हुआ। सात बेंचों पर लंबित और मुकदमा पूर्व श्रेणी के मामलों का निपटारा किया। लोक अदालत में 33,652 मामले उठाए गए, जिनमें से 21,027 मामलों का निपटारा किया गया। इन मामलों में सेटलमेंट राशि 2,54,19,167 रुपये रही।
लोक अदालत के दौरान राजस्व से जुड़े 4,224 मामलों का शत-प्रतिशत निपटारा किया गया। इसी प्रकार एमएसीटी के 225 मामलों में से 77 का निपटारा किया गया। वैवाहिक विवाद के 167 मामलों में से 115 का निपटारा भी किया गया। वहीं श्रमिक विवाद और सेवा मामलों में कोई मामला नहीं उठाया गया। सबसे अधिक भीड़ यातायात चालान के निपटारा कराने वालों की दिखाई दी।
सबसे अधिक निपटारा और बड़ी सेटलमेंट राशि वाले मामले
चेक बाउंस : इस श्रेणी में सर्वाधिक सेटलमेंट राशि दर्ज की गई। उठाए गए 1,526 मामलों में से 884 का निपटारा किया गया और कुल निस्तारण राशि 1,31,35,990 रुपये रही।
सिविल : 738 मामलों में से 476 का निपटारा हुआ, जिसमें 1,03,23,313 रुपये का निस्तारण शामिल रहा।
अन्य मामले : 23,866 मामलों में से 13,016 का निपटारा किया गया और सेटलमेंट राशि 7,81,500 रुपये का निस्तारण किया गया।
कंपाउंडेबल आपराधिक मामले : 1,512 मामलों में से 1,184 का निपटारा किया गया, जिसमें 5,24,600 रुपये की निस्तारण राशि शामिल रही।
बैंक रिकवरी मामले : कुल 1,226 मामले उठाए गए, जिनमें से 1,039 का निपटारा हुआ। निस्तारण राशि 6,20,500 रुपये रही।
इन मामलों में मिला न्याय
केस-1
10 साल बाद मिला चेक बाउंस मामले में न्याय
अंबाला निवासी एक व्यक्ति का वर्ष 2015 से चेक बाउंस का मुकदमा अदालत में चल रहा था। शनिवार को पीड़ित ने राष्ट्रीय लोक अदालत में मामले के समाधान की अर्जी लगाई। उनका केस जेएमआईसी प्रथम क्लास ध्रुव सैनी की अदालत में लगा। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद पांच लाख रुपये की राशि में चेक बाउंस के मामले में न्याय दिलाया।
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केस-2
दंपती का बसा घर
एक दंपती डेढ़ साल से अपने वैवाहिक संबंधों को लेकर परेशान चल रहा था। इसके बाद पीड़ित महिला ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में अर्जी दी और न्याय की मांग उठाई। इसके बाद महिला को एक पैनल की अधिवक्ता मुहैया कराई गई। मध्यस्तता के दौरान दोनों पार्टियों को बैठाकर समझाया गया। इसके बाद शनिवार को लोक अदालत में दंपती ने घर बसाने का फैसला लिया। वह खुशी-खुशी अदालत से अपने घर को रवाना हुए।
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केस-3
तलाक का केस लिया वापस
न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी प्रशांत राणा की अदालत में राष्ट्रीय लोक अदालत के दिन लीगल एड काउंसल अमिता के प्रयासों से दंपती के मामले का निपटारा किया गया। महिला ने अपने पति के खिलाफ तलाक और भरण-पोषण के लिए याचिका दायर की थी। दोनों काफी समय से अलग रह रहे थे और तलाक की गंभीर संभावना के साथ वैवाहिक मतभेदों का सामना कर रहे थे। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के प्रयासों से दोनों पक्षों ने अपने विवादों को निपटा लिया। इसके बाद तलाक, भरण-पोषण के लिए अपनी चल रही याचिकाएं वापस लेकर फिर से एक साथ रहने का फैसला किया।
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केस-4
बैंक और देनदार के बीच बनी सहमति
राष्ट्रीय लोक अदालत में 60,000 रुपये की राशि का एक मामला आया। जिसका शीर्षक बंधन बैंक बनाम कमला रानी था। जो स्थायी लोक अदालत के समक्ष लंबित था। मध्यस्थता के माध्यम से सफलतापूर्वक सुलझा लिया गया। स्थायी लोक अदालत की कार्यवाही के दौरान बकाया ऋण राशि के निपटारे को लेकर पक्षों के बीच चर्चाएं चल रही थीं। हालांकि, काफी प्रयासों के बावजूद, पक्षकार अपने मतभेदों को सुलझाने में असमर्थ रहे, और राशि को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका क्योंकि दोनों पक्ष आपसी शर्तों पर सहमत नहीं हो पाए थे। परिस्थितियों को देखते हुए, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट व डीएलएसए के सचिव ने मामले को मध्यस्थता के लिए भेज दिया। इसके बाद, प्रशिक्षित मध्यस्थ ज्योति कौशल ने इस मामले को संभाला और मध्यस्थता की कार्यवाही का संचालन किया। लोक अदालत में 40 से 50 मिनट के सत्र के बाद दोनों पार्टियां समझौते के लिए तैयार हो गईं। खास बात यह रही कि जहां पहले बैंक एकमुश्त निपटान पर जोर दे रहा था, वहीं मध्यस्थता के बाद बैंक उधारकर्ता की चिंताओं को समायोजित करते हुए, सहमत राशि को किस्तों में स्वीकार करने पर सहमत हो गया।