नारायणगढ़। नारायणगढ़ के युवा शोधकर्ता वारिस चौहान ने वैज्ञानिक जगत में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। वारिस ने पारंपरिक आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान का अनूठा संगम करते हुए एक विशेष न्यूट्रास्यूटिकल कंपोजिशन तैयार किया है, जिसका पेटेंट हाल ही में प्रकाशित हुआ है।
फगवाड़ा स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी से मृदा विज्ञान में परास्नातक कर रहे वारिस ने अश्वगंधा और क्रिएटिन के संयोजन से यह फॉर्मुलेशन तैयार किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि जहां अश्वगंधा मानसिक तनाव कम करने और स्टैमिना बढ़ाने में सहायक है, वहीं क्रिएटिन मांसपेशियों की ताकत और रिकवरी के लिए जाना जाता है। इन दोनों का संतुलित मिश्रण खिलाड़ियों और फिटनेस के प्रति जागरूक लोगों के लिए मददगार साबित हो सकता है।
वारिस के पिता सदीक चौहान खेती-किसानी के साथ-साथ पत्रकारिता के क्षेत्र में भी सक्रिय हैं। बेटे की इस सफलता पर पूरे परिवार और क्षेत्र में खुशी का माहौल है। वारिस ने बताया कि उनका लक्ष्य भारतीय जड़ी-बूटियों की शक्ति को आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़कर वैश्विक मंच पर स्थापित करना है। वारिस चौहान केवल लैब तक ही सीमित नहीं हैं। वह खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों में भी यूनिवर्सिटी का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। वर्तमान में वह कृषि उत्पादों पर भी अपना शोध जारी रखे हुए हैं।