15 साल पहले तक गांव बोह के वैद्य सूरजभान के जिस घर में दूर-दूर से लोग अपने मर्ज की दवा लेने पहुंचते थे। पत्नी एमए इंग्लिश पास और तीन बेटियां व बेटा भी पढ़ा लिखा। सूरजभान की मौत के बाद से ही एक-एक कर पूरा परिवार अपना मानसिक संतुलन ही खो बैठा। करीब 10 साल पहले मां मानसिक बीमार हुई और उसकी मौत हो गई और इसी तरह से बड़ी बेटी भी दम तोड़ गई। घर पर इंदू व अनिल दोनों ही रहने लगे।
एमए इंग्लिश मां व बड़ी बहन की मौत के बाद एमए-बीएड इंदू व अनिल रहते थे अकेले
धीरे-धीरे बहन इंदू और फिर अनिल भी पूरी तरह से अपना मानसिक संतुलन खो बैठे। इन दिनों स्थिति यह बन गई थी कि वैद का घर पूरी तरह से खडहंर में तब्दील हो चुका है। इंदू व अनिल दोनों एक ही कमरे में रहते थे और गांव के लोग व दूर के रिश्तेदार ही उन्हें खाना देते थे। कुछ दिन पहले ही गांव के एक घर में मौत के बाद पंजाब से उनके रिश्तेदार पहुंचे थे और उनकी नजर दोनों भाई-बहन पर पड़ी थी।
पंजाब में चलेगा उपचार
उनकी वीडियो बनाने के बाद शुक्रवार देरशाम को लुधियाना की संस्था ने उनका रेस्क्यू किया और अपने साथ ले गए। जहां वह उनकी देखभाल के साथ-साथ उपचार भी करेंगे। बताया जाता है कि वैद्य सूरजभान की दो शादियां हुई थी। दूसरी पत्नी व उसके तीनों बच्चे मानसिक रूप से बीमार हो गए थे।
सालों से बिना बिजली व दरवाजे के कमरे में रहते थे दोनों
अमर उजाला की टीम ने गांव बोह मानसिक रूप से बीमार के घर जाकर देखा तो दृश्य झंझोर देने वाला था। घर में दरवाजा नहीं था, बिजली का कनेक्शन भी नहीं था, वहीं कमरे की दीवारों पर केवल कालिख ही कालिख थी। जो बयां कर रही थी कि कभी लकड़ियां तो कभी कपड़ों को जला दिया गया हो। चारों तरफ कबाड़ बिखरा हुआ था। एक कमरा तो गांव व आसपास से चुगी गई लकड़ियों से भरा हुआ था। घर के पास वाली करियाना दुकान मालिक योगेश से पूछा तो उन्होंने बताया कि गांव के लोग खाना खिलाते थे। हालांकि दोनों कभी पत्थर तो कभी गालियां देते थे बावजूद पूरा गांव उनके सहायता के लिए खड़ा था। जबकि अपने रिश्तेदारों ने मुंह फेर लिया था।