नारायणगढ़। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी डॉ. जितेंद्र कुमार की अदालत ने दहेज प्रताड़ना, मारपीट और आपराधिक धमकी के एक मामले में आरोपी पति और सास को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है। इस मामले में मुख्य शिकायतकर्ता और पीड़ित महिला के अपने बयानों से मुकर जाने के कारण अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित करने में विफल रहा।
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल चार गवाह पेश किए। हालांकि, जब मुख्य गवाह और शिकायतकर्ता प्रीत कौर कटघरे में आई, तो उसने अभियोजन की कहानी का समर्थन नहीं किया। उसने अदालत में गवाही दी कि शादी के बाद केवल कुछ गलतफहमी हुई थी और वह अपने मायके वापस आ गई थी। उसने स्पष्ट रूप से कहा कि उसके पति राम लाल और सास ने न तो कभी उसे मारा-पीटा और न ही कभी दहेज की मांग की।
अदालत का फैसला : मुख्य गवाह के अपने बयान से मुकर जाने के कारण अदालत ने माना कि आरोपियों के खिलाफ कोई विश्वसनीय साक्ष्य मौजूद नहीं है।
न्यायाधीश ने अपने फैसले में कहा कि चूंकि मुख्य गवाह ने ही अभियोजन पक्ष का समर्थन नहीं किया है, इसलिए आरोपियों को दोषी ठहराने का कोई आधार नहीं बचता। अदालत ने राम लाल और उसकी मां कमलेश देवी को सभी आरोपों से मुक्त करते हुए उनके बेल बांड और श्योरिटी बांड भी डिस्चार्ज कर दिए।