अंबाला। छावनी के रेलवे स्टेशन सोमवार को दो बंदरों ने उत्पात मचाया। इनके उत्पात से स्टेशन पर यात्रियों में भगदड़ मचती दिखाई दी। वहीं, सबसे बड़ी मुसीबत तो रेलवे प्रशासन के लिए तब बनी जब उन्होंने सरकारी विभागों ने बंदर पकड़ने की मदद मांगी तो सभी ने हाथ खड़े कर दिए।
ये बंदर लगातार स्टेशन पर इधर से उधर घूम रहे हैं। कभी वो रेलवे परिसर में तो कभी प्लेटफार्म पर पहुंच जाते हैं। ये बंदर खानपान स्टाल से भी सामान उठाकर भाग रहे हैं। इस दौरान अगर किसी यात्री के हाथ में कोई भी सामान नजर आता है तो उसे भी वो झपटा मारकर छीन लेते हैं। अगर उनका कोई विरोध करता है या उन्हें डराने की कोशिश करते हैं।
बंदर पकड़ने की जिम्मेदारी से झाड़ा पल्ला
अगर घर, गली या फिर मोहल्ले में बंदर घुस जाए और वो किसी को काट खाए, उत्पात मचाए तो उसे पकड़ने की जिम्मेदारी वाइल्ड लाइफ की नहीं, बल्कि नगर परिषद की है। यह जवाब खुद वाइल्ड लाइफ के निरीक्षक ने दिया। उन्होंने कहा कि अप्रैल 2023 से उनके पास जो नई अधिसूचना आई है, उसके तहत अब वो किसी भी बंदर को नहीं पकड़ सकते। जबकि नगर परिषद ने ऐसी किसी सूचना से इंकार किया है। उनका कहना है कि आवारा कुत्तों को पकड़कर उनकी नसंबदी को ठेका वो देते हैं न कि उन्हें पकड़कर कहीं और छोड़ने का। ऐसे में अब स्टेशन पर आने वाले यात्रियों की मुसीबत बढ़ गई है और वो भी उस समय जब रेलवे स्टेशन पर छठ पर्व को लेकर काफी भीड़ है।
वर्जन
बंदरों के आतंक की सूचना मिली थी। इस पर कार्रवाई की जा रही है। एजेंसियों से संपर्क कर रहे हैं, जिससे कि इन पर अंकुश लगे और रेलयात्रियों को समस्या का सामना न करना पड़े।
नवीन कुमार, वरिष्ठ वाणिज्य प्रबंधक।
वर्जन
अप्रैल 2023 में एक नई अधिसूचना आई थी, इसके तहत वो अब बंदर नहीं पकड़ सकते। यह काम नगर परिषद का है, वो ही इस संबंध में कार्रवाई कर सकते हैं। बंदरों को पकड़ने की जिम्मेदारी वाइल्ड लाइफ की है, न कि नगर परिषद की। ऐसी कोई भी जानकारी उनके संज्ञान में नहीं है और न ही बंदरों को पकड़ने के लिए कोई प्रशिक्षित कर्मचारी है।
राजेश कुमार,सचिव नप सदर।