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Ambala News: माइक्रोस्कोप इंडस्ट्रीज का खत्म हो रहा विदेशी निर्यात

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- उद्यमियों का व्यापार हुआ सीमित, असुरक्षित और घटिया गुणवत्ता का माल आने से बढ़ी परेशानी
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माई सिटी रिपोर्टर

अंबाला। घरेलू मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर सस्ते आयात का ग्रहण लग गया है। विदेशों से बिना किसी कड़े मानक के आ रहे कम लागत वाले सामान ने स्थानीय उद्योगों की हालत पस्त कर दी है। अब विशेषज्ञों और उद्योग संगठनों ने सरकार से कड़े सुरक्षात्मक उपाय और गुणवत्ता नियंत्रण लागू करने की मांग की है।
क्रिस्को इंटरनेशनल के संचालक रविंद्र कुमार बताते हैं कि अंबाला से पहले यूएसए, यूरोपियन, एशियान देशों में माइक्रोस्कोप को हम निर्यात करते थे। अब यह काम पूरी तरह से खत्म हो गया है। अब सिर्फ देश में ही माल बेच पा रहे हैं। जिसने आय को सीमित कर दिया है। आय सीमित होगी तो व्यापार को बड़ा नहीं कर सकेंगे। अंबाला में माइक्रोस्कोप बनाने वाली ब्रांडेड 25 से 30 निर्माता हैं। वहीं माइक्रोस्कोप से जुड़े उनके कलपुर्जे बनाने वाले 200 से अधिक यूनिट हैं।
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माइक्रोस्कोप निर्माताओं के सामने चुनौती

बिना नियमन के आ रहे सामान ने सबसे ज्यादा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) को प्रभावित किया है। इनमें मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक सामान और खिलौने, स्टील और धातु उत्पाद, केमिकल्स और प्लास्टिक, कपड़ा और जूते-चप्पल शामिल हैं। अब साइंस उत्पाद भी इस सूची में शामिल होते जा रहे हैं। इन्हीं वजहों से अंबाला में माइक्रोस्कोप निर्माता इंडस्ट्रीज काफी चुनौतीभरा माहौल महसूस कर रही है।
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गुणवत्ता से समझौता पड़ रहा भारी

अंबाला साइंटिफिक इंस्ट्रूमेंट मैन्यूफेक्चरर एसोसिएशन के पूर्व महासचिव गौरव सोनी बताते हैं कि पड़ोसी देशों से आने वाला सामान सस्ता है। वह भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के कड़े पैमानों पर भी खरा नहीं उतरता। घरेलू निर्माताओं को कड़े पर्यावरणीय और लेबर कानूनों का पालन करना पड़ता है, जिससे उनकी लागत बढ़ जाती है। वहीं, विदेशी कंपनियां डंपिंग के जरिए भारतीय बाजार पर कब्जा कर रही हैं। इससे छोटे निर्माताओं के लिए संकट खड़ा हो रहा है।


उद्यमियों की मुख्य मांगें-

- एंटी-डंपिंग ड्यूटी : औने-पौने दाम पर आने वाले सामान पर भारी शुल्क लगे।

- अनिवार्य क्यूसीओ : सभी आयातित उत्पादों के लिए क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर अनिवार्य हो।

- सख्त लैब टेस्टिंग : बंदरगाहों पर ही सामान की कड़ी गुणवत्ता जांच की जाए।

- नॉन-टैरिफ बैरियर : तकनीकी मानकों को इतना सख्त बनाया जाए कि घटिया सामान देश में प्रवेश न कर सके।
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