अंबाला सिटी। किसी स्पा सेंटर या वेश्यालय में केवल ग्राहक के तौर पर मौजूद होना अपराध नहीं। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया है। यह अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम (आईटीपीए) के तहत अपराध की श्रेणी में नहीं आता। न्यायमूर्ति कीर्ति सिंह की एकल पीठ ने अंबाला के बलदेव नगर पुलिस स्टेशन में दर्ज प्राथमिकी को रद्द करते हुए याचिकाकर्ता को राहत दी है।
अदालत ने कहा कि अनैतिक व्यापार अधिनियम की धारा 3 से 7 के प्रावधान उन लोगों पर लागू होते हैं जो वेश्यालय चलाते हैं। लड़कियों का शोषण करते हैं या वेश्यावृत्ति की कमाई पर जीवित रहते हैं। रिकॉर्ड में ऐसा कोई सबूत नहीं मिला जिससे यह साबित हो कि याचिकाकर्ता स्पा का प्रबंधन कर रहा था या महिलाओं की तस्करी में शामिल था। जस्टिस कीर्ति सिंह ने अपने फैसले में लिखा कि अधिक से अधिक याचिकाकर्ता को उक्त स्पा सेंटर में एक ग्राहक कहा जा सकता है। इसलिए उसके खिलाफ कथित अपराध का कोई मामला नहीं बनता।
पिछले साल दर्ज किया था मामला
मामला 27 अक्तूबर 2025 का है। पुलिस ने द गोल्डन एरा सैलून थेरेपी नामक स्पा सेंटर पर गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी की थी। पुलिस का आरोप था कि स्पा की आड़ में वेश्यावृत्ति का धंधा चलाया जा रहा है। कार्रवाई के दौरान याचिकाकर्ता मोहित को एक केबिन में एक युवती के साथ आपत्तिजनक स्थिति में पाया गया था। पुलिस ने उसके खिलाफ अनैतिक व्यापार (रोकथाम) अधिनियम ‘आईटीपीए’ की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की थी।
अदालत में याचिकाकर्ता के तर्क
याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत में दलील दी कि उनका मुवक्किल केवल बाल कटवाने के लिए वहां गया था। वह केवल एक ग्राहक था। उनका तर्क था कि याचिकाकर्ता न तो उस स्पा सेंटर का मालिक था और न ही उसके प्रबंधन में शामिल था। उसे गलत तरीके से फंसाया गया है।
एफआईआर हुई रद्द
हाईकोर्ट ने माना कि याचिकाकर्ता के खिलाफ कार्यवाही जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा। अदालत ने और उससे जुड़ी सभी आगामी कार्यवाहियों को याचिकाकर्ता के हक में रद्द करने का आदेश दिया। यह फैसला उन मामलों में एक नजीर बनेगा जहां पुलिस कार्रवाई के दौरान केवल ग्राहकों को भी गंभीर धाराओं में नामजद कर लेती है। अदालत ने साफ कर दिया है कि जब तक कोई व्यक्ति वेश्यावृत्ति के व्यापार या शोषण में सक्रिय रूप से शामिल नहीं है, उसे केवल वहां मौजूदगी के आधार पर अपराधी नहीं ठहराया जा सकता।