म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन अंबाला (एमसीए) के कमिश्नर शक्ति सिंह और मेयर रमेश लाल मल के बीच रार इतनी ज्यादा बढ़ गई है कि ये विवाद अब पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में पहुंच गया है।
वीरवार को इसी विवाद के चलते मेयर रमेशलाल मल द्वारा हाईकोर्ट में एमसीए कमिश्नर और हरियाणा सरकार के खिलाफ याचिका डाली गई।
इस याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने एमसीए कमिश्नर की नियुक्ति को नियमानुसार करार न देते हुए सरकार की ओर से पेश हुए वकीलों को फटकार लगाई है।
हाईकोर्ट ने तुरंत प्रभाव से एमसीए कमिश्नर के पूर्व फैसलों और भावी कामों पर फिलहाल रोक लगा दी है और इस मामले में हरियाणा सरकार, मुख्य सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव पर्सनल, एससीए कमिश्नर और अंबाला डिविजन की कमिश्नर को नोटिस जारी कर बीस अगस्त को अपना जवाब दाखिल करने के आदेश दिए हैं।
विवाद के कारण विकास का बंटाधार
उल्लेखनीय है कि एमसीए मेयर रमेश लाल मल और एमसीए कमिश्नर शक्ति सिंह के बीच पिछले काफी दिनों से रार चल रही है। इसी रार के चलते ट्विनसिटी का विकास भी दांव पर लगा हुआ है।
इसी के चलते पहली बार एमसीए की बैठक में मेयर समेत चौदह पार्षदों ने वाकआउट किया और इसी वजह से स्मार्ट सिटी की दौड़ में अंबाला अपेक्षाकृत पीछे ही रह गया। मेयर और कमिश्नर दोनों एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाते रहते थे। अंतत: अब एमसीए मेयर ने कुछ पार्षदों के साथ हाईकोर्ट में एमसीए कमिश्नर की नियुक्ति को ही चुनौती दे डाली है। इस सारी खींचतान के चलते पिछले कई महीनों से ट्विनसिटी में विकास का बंटाधार हो रहा है और इसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है।
आईएएस अफसर कम हैं, तो क्या डीसी की सीट पर पटवारी बिठा दें?
मेयर और एमसीए कमिश्नर के इस विवाद में मेयर रमेशलाल मल ने हाईकोर्ट में याचिका लगाकर कहा है कि एमसीए कमिश्नर पद पर नियुक्ति म्यूनिसिपल कारपोरेशन एक्ट के तहत नहीं हुई है।
उनकी ओर से हाईकोर्ट में पेश हुए वकील आरपी सिंह के अनुसार एमसी एक्ट 45 के तहत एमसीए कमिश्नर कम से कम पांच साल का अनुभवी आईएएस अफसर ही बन सकता है। मगर शक्ति सिंह एचसीएस अफसर हैं। लिहाजा उनकी एमसीए कमिश्नर पद पर सरकार ने उनकी नियुक्ति नियमानुसार नहीं की है।
सिंगल बैंच पर हुई इस सुनवाई में सरकार की ओर से पेश हुए एडिशनल एडवोकेट जनरल ने दलील देते हुए कहा कि सरकार जल्द ही इस एक्ट में संशोधन करने जा रही है, इस मामले में जल्द ही एक विधेयक कैबीनेट में लाकर इस एक्ट में संशोधन कर दिया जाएगा।
उन्होंने हाईकोर्ट को बताया कि ऐसा इसलिए किया गया है कि सरकार के पास फिलहाल आईएएस अफसरों की कमी है, इसलिए म्यूनिसिपल कारपोरेशन अंबाला के कमिश्नर पद पर एचसीएस अफसर को लगाया है।
मेयर की ओर से पेश हुए वकील आरपी सिंह ने बताया कि अदालत ने सरकारी वकील की दलील सुनकर फटकार लगाते हुए कहा कि आईएएस अफसर कम हैं, तो क्या डीसी की सीट पर पटवारी बिठा दें? साथ ही बिना एक्ट में संशोधन किए सरकार ने म्यूनिसिपल कारपोरेशन अंबाला के कमिश्नर की सीट पर एचसीए अफसर कैसे लगाया।
यदि ऐसा करना था तो पहले एक्ट में नियमानुसार सरकार को विधेयक लाकर संशोधन करना चाहिए था। हाईकोर्ट ने इस मामले में फिलहाल एमसीए कमिश्नर की नियुक्ति को नियमानुसार न बताते हुए उनके पूर्व पर लिए फैसलों व भावी कामों पर रोक लगा दी है और सरकार व अन्य अफसरों को नोटिस जारी कर इस मामले में जवाब मांगा है।
इस मामले में मैं कुछ नहीं कहूंगा। मुझे इस बारे में कहीं से मालूम चला है, लेकिन अभी मेरे पास कोई नोटिस नहीं पहुंचा है। नोटिस का जवाब दिया जाएगा। मेरा किसी से कोई विवाद नहीं है, मैं नियमानुसार ही कार्रवाई करता हूं, किसी के दबाव में आकर मैं कभी न गलत काम करता हूं और न ही करूंगा।
-शक्ति सिंह, कमिश्नर, एमसीए
एमसीए कमिश्नर काफी समय से मनमानियों पर उतारू थे और अन्य अफसरों भी उन्ही की शह पर जनप्रतिनिधियों को दरकिनार कर रहे थे। एमसीए कमिश्नर और एक्सईएन को कई लैटर लिखे गए, मगर इन अफसरों ने मेयर के किसी भी पत्र का जवाब देना उचित नहीं समझा, तो ये जनता की समस्याओं का क्या समाधान करवाएंगें। मैने भी हर पत्र जनहित में ही जनता की समस्याओं और अवैध कब्जों पर रोक लगाने के लिए लिखे थे, लेकिन एमसीए अफसरों ने अपनी मनमर्जी की। इसलिए मजबूरन हाईकोर्ट जाना पड़ा।
-रमेशलाल मल, मेयर, एमसीए
ट्रेनिंग से लौटे डीसी की भी चिंता बढ़ी
करीबन दो माह बाद अंबाला के डीसी मनदीप सिंह बराड़ ट्रेनिंग से लौट आए हैं। उन्हें आते ही एमसीए अफसरों, मेयर व पार्षदों में खींचतान की सूचना भी मिल गई है। इस स्थिति से डीसी बराड़ बहुत ज्यादा चिंतित है। वे हैरान है कि दो माह के भीतर ही एमसीए के हालात इतघे कैसे बिगड़ गए।
एमसीए सदन की 16 जुलाई को मेयर व पार्षदों ने हंगामा करते हुए जो वाकआउट किया, उससे तो डीसी ज्यादा चिंतित है। क्योंकि एमसीए सदन की इससे पहली मीटिंग में वे खुद बतौर एमसीए कमिश्नर मौजूद थे। डीसी रहते हुए उनके बाद एमसीए कमिश्नर का एडहॉक चार्ज था। मगर बाद में हरियाणा सरकार ने एमसीए कमिश्नर शक्ति सिंह को नियुक्त कर डीसी बराड़ का कार्यभार हल्का कर दिया था। डीसी बराड़ के अनुसार इस मामले में देखते हैं क्या हो सकता है, क्योंकि शहर के विकास के लिए ऐसे विवाद बाधा बनते हैं।