अंबाला सिटी। नगर निगम अंबाला शहर में महिला आरक्षित मेयर के उपचुनाव की घोषणा होने पर मंगलवार को सियासी हलचल तेज हो गई। अंबाला शहर नगर निगम में 11 महीने के लिए मेयर चुना जाएगा। प्रदेश में भाजपा की सरकार है और अंबाला शहर में कांग्रेस के विधायक हैं।
ऐसे में भाजपा और कांग्रेस में रोमांचक मुकाबला देखने को मिल सकता है। मगर 11 महीने के लिए मेयर बनने को लेकर पहले ही राजनैतिक दलों में अधिक रुचि नहीं दिख रही थी। अब दल किसे उतारते हैं और कौन तैयार होता है यह देखने योग्य रहेगा। दिसंबर 2020 में हुए मेयर चुनाव में शहर के 1 लाख 87 हजार मतदाता में से 1 लाख 5 हजार मतदाताओं ने मतदान किया था, जबकि 82 हजार ऐसे मतदाता थे, जिन्होंने वोट डालने में दिलचस्पी नहीं दिखाई थी। सिर्फ 56.3 प्रतिशत ने ही वोट डाला था। इसी तरह 2 जून 2013 में हुए पहले नगर निगम चुनाव में 67 प्रतिशत ने ही वोट डाले थे। तब रमेश मल पहले मेयर बने थे।
टिकट के लिए माने जा रहे दावेदार
नगर निगम के मेयर उप चुनाव में भाजपा और कांग्रेस में रोचक मुकाबला देखने को मिलेगा। शहर में भाजपा से अधिवक्ता संदीप सचदेवा की पत्नी सैलजा सचदेवा, डॉ. संजय शर्मा की पत्नी वंदना शर्मा और सुंदर ढींगरा की पत्नी मौजूदा सीनियर डिप्टी मेयर मीना ढींगरा, दिवंगत पूर्व विधायक वीना छिब्बर की पुत्रवधू अर्चना छिब्बर की भी मेयर के टिकट के लिए प्रबल दावेदारी मानी जा रही है। इसी तरह कांग्रेस भी अपनी तैयारी में जुटी है। शहर में कांग्रेस से निर्मल सिंह विधायक हैं। वहीं, कांग्रेस से मौजूदा नगर निगम डिप्टी मेयर एवं कांग्रेस के पूर्व जिला कोआर्डिनेटर राजेश मेहता के परिवार से प्रबल दावेदारी मानी जा रही है। उनकी माता दर्शना मेहता भी 2005 से 2020 तक पार्षद रही हैं। इसी तरह कांग्रेस से अमीषा चावला, मेघा इशू गोयल, विनोद धीमान की पत्नी की भी दावेदारी मानी जा रही है।
शक्तिरानी के विधायक बनने से पद हुआ था रिक्त
जनवरी 2021 में शक्ति रानी शर्मा ने नगर निगम में मेयर का पदभार संभाला था। वह हरियाणा जनचेतना पार्टी से चुनाव लड़ी थी। इस चुनाव में शक्ति रानी शर्मा को 37 हजार 604, भाजपा की वंदना शर्मा को 29 हजार 520 वोट, हरियाणा डेमोक्रेोटिक फ्रंट की अमीषा चावला को 16 हजार 421 वोट और कांग्रेस की मीना अग्रवाल को 13 हजार 797 वोट मिले थे। हरियाणा जनचेतना पार्टी की शक्तिरानी शर्मा ने भाजपा की वंदना शर्मा को आठ हजार 84 मत से हराया था। बीते विधानसभा चुनाव में शक्ति रानी शर्मा कालका से विधायक बन गई हैं। उन्होंने भाजपा की सीट से चुनाव लड़ा था। अब यह पद रिक्त हो गया है। जनवरी 2026 तक मेयर का कार्यकाल बचा है।
विकास कार्य हो रहे थे प्रभावित
दरअसल, मेयर शक्ति रानी शर्मा के विधायक बनने के बाद से यह पद खाली था। इस वजह से नगर निगम में विकास कार्य भी प्रभावित हो रहे थे। मेयर का पद खाली होने से निगम की हाउस बैठक भी नहीं हो पाई। इससे कई अहम प्रस्ताव भी पास नहीं हो पा रहे थे। कई ऐसे मुद्दे हैं, जिनका हाउस की बैठक होने के उपरांत ही समाधान हो सकता है।
छह वर्ष बाद हो रहे नप के चुनाव
छह वर्ष बीत जाने के बाद भी नगर परिषद के चुनाव हो रहे हैं। बिना जनप्रतिनिधि के लोग परेशान हो रहे थे और इस दौरान क्षेत्रों में विकास कार्य भी नहीं हो पा रहे थे। वहीं आमजन से जुड़े जरूरी दस्तावेजों को सत्यापित करवाने के लिए भी लोगों को धक्के खाने पड़ रहे थे। ऐसे में लोगों की दिक्कत लगातार बढ़ती जा रही थी। जबकि वर्ष 2018 में नगर निगम से अलग होकर नगर परिषद के 31 वार्डों की फाइनल वार्डबंदी रिपोर्ट भी तैयार कर दी गई थी। बावजूद इसके नगर परिषद के चुनाव नहीं हो पाए थे। इसके बाद सरकार ने नियमों में बदलाव कर दिए और फिर नगर परिषद में वार्डों की संख्या बढ़ गई यानी की 31 से 32 वार्ड हो गए और फिर नए सिरे से वार्डबंदी का कार्य आरंभ किया गया था।
वर्जन
मेयर उप चुनाव की घोषणा हो गई है। अगर पार्टी की ओर से चुनाव लड़ने का निर्देश होगा तो मेयर उपचुनाव लडेंगे। अभी कार्यकाल में 11 महीने का समय बचा है।
मीना ढींगरा, सीनियर डिप्टी मेयर, नगर निगम।
वर्जन
शहर के विकास के लिए मेयर चुनाव जरूरी हैं। मेयर पद खाली होने से शहर के काफी प्रोजेक्ट अधूरे हैं। मेयर बनने के बाद शहर में विकास कार्य होंगे।
रमेश मल, पूर्व मेयर, नगर निगम।
वर्जन
मेयर उप चुनाव का बिगुल बज गया है। लगभग 11 महीने का कार्यकाल मेयर का बचा है। मेयर बनने के बाद शहर के विकास को गति मिलेगी। अभी रिक्त पद होने से विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
राजेश मेहता, डिप्टी मेयर, नगर निगम।