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Ambala News: मां अंबिका देवी मंदिर में प्राचीन समय से पिंडी स्वरूप में विराजमान हैं माता

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संवाद न्यूज एजेंसी
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अंबाला सिटी। अंबाला शहर स्थित मां अंबिका देवी माता का मंदिर करीब 300 वर्ष पुराना है। देवी अंबा, अंबिका और अंबलिका को समर्पित इस मंदिर का निर्माण ब्रिटिश युग से पहले किया गया था।

ये मंदिर न केवल सबसे पुराना है, बल्कि इस स्थान की उत्पत्ति का विशेष महत्व भी है। अंबाला का नाम भी देवी मां अंबा के नाम पर है। इस मंदिर की दीवारों और छत पर सुंदर पेंटिंग बनी है जो समय बीतने के कारण फीकी हो गई हैं। क्षेत्र के लोगों के मुताबिक करीब 300 वर्ष पूर्व इस मंदिर में माता अंबिका पिंडी स्वरूप में अवतरित हुई थीं। इसके बाद भक्तों ने इसी स्थान पर मां अंबिका देवी माता का एक छोटा सा मंदिर बनाया। धीरे धीरे भक्तों की संख्या बढ़ने पर मंदिर का विस्तार
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किया गया।

मंदिर में करीब 150 वर्षो से पुजारी अरानंद के परिवार की पीढि़यां सेवाएं दे रही हैं। अंग्रेजों के समय में पंडित हरकुमार के दादा पड़दादा मंदिर की सेवा कर रहे थे। इसी परिवार के पंडित दूणीचंद और पंडित सोमनाथ ने वर्ष 1988 तक अपनी सेवाएं प्रदान की। वर्ष 1988 में कुछ महीनों के अंतराल पर दोनों पंडितों का देहांत होने के बाद उन्हीं के परिवार के पंडित सतीश कुमार ने ये जिम्मेदारी संभाल ली। वर्ष 2019 उनके निधन के बाद से उसी परिवार के पंडित जितेन्द्र शर्मा, पंडित अमित शर्मा व पंडित रवि शर्मा मंदिर की सेवा कर रहे हैं। मंदिर के पुजारियों के मुताबिक काफी समय से मंदिर का संचालन अंबाला शहर में रहने वाला भंडारी परिवार कर रहा है। उनकी ओर से समय से समय-समय पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में सहयोग दिया जाता है। वर्तमान में ये परिवार चंडीगढ़ में रह रहा है, लेकिन आज भी मंदिर का प्रबंधन इसी परिवार के पास है।
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