माही के पिता गुरजीत सिंह अमेरिका में प्राइवेट नौकरी करते हैं। माता मोनिका गृहिणी हैं। माही ने बताया कि वह डाॅक्टर बनना चाहती है और इस लक्ष्य को पाने के लिए काफी मेहनत करने के लिए भी तैयार हैै। अभी तक माही के पास अपना मोबाइल नहीं है। इसी कारण से वह सोशल मीडिया से दूर रहीं। वह इसे अपनी कामयाबी का कारण मानती है।
बिना की ट्यूशन के हासिल किया ये मुकाम
माही ने बताया कि उन्होंने बिना की ट्यूशन के सेल्फ स्टडी से ये मुकाम हासिल किया है। वह शाम को साढ़े पांच बजे पढ़ने बैठ जाती थी और रात्रि के एक बजे तक पढ़ती थी। जब परीक्षा पास आई तो शादी और दूसरे समारोहों से दूरी बना ली। माही अपनी सफलता के बारे में बताते हुए भावुक हो गईं।
माही ने कहा कि मुझे विश्वास था कि मैं अच्छे अंक लेकर आऊंगी, क्योंकि मैंने जी-तोड़ मेहनत की थी। इसी दौरान माही ने अपने पिता को फोन कर रिजल्ट के बारे में बताया तो वे भी खुश हो गए।
चाचा ने भी किया माही को प्रेरित
माही के चाचा मनीष कुमार ने बताया कि वह सरकारी स्कूल में कंप्यूटर शिक्षक हैं। वह भी माही को लगातार प्रेरित करते रहे हैं। उन्होंने बताया कि हमारा किसान परिवार है। हम सभी संयुक्त रूप से रहते हैं। स्कूल प्रधानाचार्य कर्मचंद सैनी ने भी माही को बधाई दी। माही शाहपुर नुर्द के निकट रहने वाले जाटों की टपरियां गांव की रहने वाली हैं।
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तीन से चार घंटे पढ़कर पाया मुकाम
सोफिया ने 95.4 प्रतिशत अंक किए हासिल
छावनी के जैन गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल की सोफिया ने 95.4 प्रतिशत अंक हासिल किए। सोफिया ने 500 में से 477 अंक लिए। सोफिया की माता दिलकिश गृहिणी हैं और पिता फुरखान की दुकान है। सोफिया ने बताया कि उन्होंने एनसीईआरटी की किताबें पढ़ी। वह रोजाना तीन से चार घंटे तक पढ़ाई करती थी। 11वीं कक्षा में उन्होंने नॉन मेडिकल संकाय लिया है। वह इंजीनियर बनना चाहती है। स्कूल से जो होमवर्क दिया जाता था। वह घर जाकर भी रिवाइज करती थी। वह रात को देर रात तक पढ़ाई करती थी।
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नितिन का डॉक्टर बनने का लक्ष्य
छावनी के एसडी सीनियर सेकेंडरी स्कूल के नितिन कुमार ने 500 में से 474 अंक के साथ 94.8 प्रतिशत अंक लिए। नितिन कुमार ने बताया कि उनकी माता रीटा देवी गृहिणी हैं और पिता विनोद कुमार सब्जी मंडी की दुकान में काम करते हैं। वह अब मेडिकल संकाय से पढ़ाई करेगा। वह डाॅक्टर बनना चाहता है। उसने बताया कि वह रोजाना चार से छह घंटे तक पढ़ाई करता था। इतने नंबर आने की उम्मीद नहीं थी। अब उनको काफी अच्छा लग रहा है।
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सुहानी बोली, रट्टा के बजाय समझना जरूरी
पीकेआर जैन कन्या सीनियर सेकेंडरी स्कूल की सुहानी ने 94.8 प्रतिशत अंक हासिल किए। उनके 500 में से 474 अंक आए। सुहानी ने बताया कि उसकी माता प्रीति और पिता विकास बत्रा दोनों प्राइवेट नौकरी करते हैं। सुहानी ने बताया कि वह आईएएस बनना चाहती है। उन्होंने स्कूल के कार्य को निरंतर किया। स्कूल में रट्टा मारने के बजाय समझना जरूरी होता है। उसने सेल्फ स्टडी कर इतने नंबर हासिल किए। उनके शिक्षकों का काफी सहयोग रहा है। माता-पिता ने भी सपोर्ट किया। वह स्कूल से घर जाकर रात नौ बजे तक पढ़ाई करती थी। सुहानी को स्कूल प्रधानाचार्या सुनीता शर्मा ने बधाई दी।
चार प्रतिशत गिरा जिले का परिणाम
इस बार जिले का परिणाम चार प्रतिशत गिरा। पिछले वर्ष यह परिणाम 95.69 प्रतिशत था। इस बार दसवीं कक्षा का परिणाम 91.49 प्रतिशत रहा।
हरियाणा बोर्ड दसवीं
सत्र कुल विद्यार्थी उत्तीर्ण विद्यार्थी पास प्रतिशत
2019-20 7189 3378 47.00
2020-21 कोरोनाकाल 100 प्रतिशत परिणाम
2021-22 8930 5211 58.36
2022-23 10048 7296 58.62
2023-24 9812 9389 95.69
2024-25 9455 8650 91.49