अंबाला। श्री बांके बिहारी मंदिर गोविंद नगर में चल रही 50वें स्वर्णिम वार्षिकोत्सव पर अमृत वर्षा हुई। कथा के पांचवें दिन श्री तुलसी मानस मंदिर हरिद्वार से आए स्वामी कामेश्वर पुरी महाराज ने बताया कि वासुदेव एवं नंद बाबा बड़े घनिष्ठ मित्र थे। स्वामी ने बताया कि अपने दुख से दुखी न होकर मित्र के सुख में सुखी होने वाला ही सच्चा मित्र है।
मित्र जैसा संबंधी इस सृष्टि में कोई नहीं है, अतः रिश्ते संबंधों में मित्रता होनी आवश्यक है। चाहे वह रिश्ता पिता-पुत्र का हो, भाई-बहन का हो या फिर पति-पत्नी का। मित्र का दुख अपना दुख समझो। मित्र का दुख रेत जैसा है तो उसे पहाड़ के समान मानकर हमें सहयोग करना चाहिए।
कथा में भगवान श्री कृष्ण का जन्म, उनकी बाल लीलाओं का वर्णन, पूतना वध, गोवर्धन पूजा की कथा श्रद्धालुओं को बड़े श्रद्धा भाव के साथ श्रवण करवाई गई। महाराज ने बताया जिन पर भगवान की कृपा होती है, वह समय पर कथा में पहुंचता है और कथा श्रवण करता है। परिस्थितियां कैसी भी हों, हमें मायाजाल से बचना चाहिए। जीवन में पास होना या फेल होना यह हम पर ही निर्भर करता है, अतः हमें कथा ध्यान से सुननी चाहिए।
अतः सोते-जागते प्रभु का स्मरण करते रहना चाहिए। कथा में संगीतमय भजनों नटवर भजो रे मन गोविंदा, सब सखियन में राधा जी बड़ी हैं, वृंदावन में रास रचाओ, हरे रामा रामा, सखी चलो नंद के द्वारा आदि भजन गाए। कथा में सभा प्रधान दिनेश बहल, महासचिव रमेश धीमान, लाजपत नारंग, प्रेम, धीरज, अरुण जीत धमीजा और ज्ञानचंद परुथी उपस्थित रहे। संवाद