मुलाना। भीषण गर्मी के बीच लोकसभा चुनावों का पारा चरम सीमा पर हैे। हर जगह चौक चौराहों पर चुनावों को लेकर ही चर्चा हो रही है। हर पार्टी के प्रत्याशी चुनाव के समय जनता के बीच हैं लेकिन इन चुनावों में स्थानीय मुद्दे दफन हो गए हैं। हल्का मुलाना की बात करें तो कई समस्याएं यहां ऐसी हैं जिनका लंबे समय से कोई समाधान नहीं मिला। हल्का मुलाना में पानी निकासी की समस्या सबसे बड़ी है।
उन्होंने कहा कि बरसात के मौसम में मुलाना से गुजर रहे नेशनल हाइवे 344 पर दोसड़का व ब्राह्मण माजरा गांव के पास बरसात का पानी हाईवे के ऊपर से गुजरता है। दोसड़का में कई दिनों तक सर्विस लेन पर ही पानी एकत्रित रहता है। इससे यातायात प्रभावित रहता है। कई शिकायतों के बावजूद भी इस समस्या पर विभाग की तरफ से कोई कार्य होता नहीं दिखाई दे रहा है। इसके अलावा हाईवे पर लगी लाइटें तक नहीं जलती जो कि करीब दो सालों से बंद हैं। इसके अलावा सिरसगढ़ में पानी निकासी के लिए नाले के निर्माण की मांग, साथ ही 2017 में तत्कालीन सीएम हरियाणा द्वारा घोषित मुलाना का बस स्टैंड आज भी नसीब नहीं हुआ है। इसके चलते स्थानीय लोगों को भीषण गर्मी में धूप के बीच खड़े होकर बसों का इंतजार करना पड़ रहा है। वहीं क्षेत्र में नंदीशाला होने के बावजूद भी सड़कों पर बेसहारा पशुओं के झुंड घूम रहे हैं जो कि कई हादसों का कारण बन चुके हैं। कालपी साहा रोड का फोरलेन न होना भी क्षेत्र के लिए बड़ी समस्या है। जुलाई 2023 में बाढ़ में टूटी सड़कों की अब तक मरम्मत नहीं हुई है। इसके अलावा भी हल्का मुलाना से कई स्थानीय समस्याएं चुनावों के समय हल की आस में इंतजार कर रही हैं।
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स्थानीय मुद्दे लोकसभा चुनावों में बेआवाज हो चुके हैं। हर नेता इन मुद्दों को भूल चुका है। चुनाव से पहले भी ये समस्याएं ज्यों की त्यों बनी हुई थीं। वहीं अब चुनाव के बाद समय ही बताएगा की इन समस्याओं का हल होगा या नहीं ।
ईश्वर कुमार।
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हर पार्टी का नेता वोट के लिए जनता से संपर्क साध रहा है। इनमें से कुछ पार्टी के नेताओं को तो स्थानीय समस्याओं का ज्ञान तक नहीं है। वहीं वोट मांगने आ रहे नेता स्थानीय समस्याओं पर कुछ बोलना ही नहीं चाहते ।
सुमित सैनी।
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समस्याओं से स्थानीय लोगों का सीधा जुड़ाव होता है। इसलिए उनका हल होना भी जरूरी है। हल्का मुलाना की कई समस्याएं आज भी सालों से बरकरार खड़ी हैं। जिनका हल कराने विभाग ने रुचि नहीं दिखाई। अब चुनावों में भी नेतागण चुप्पी साधे हुए हैं।
सौरभ मौदगिल।