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Ambala News: निविदा के फेर में धूल फांक रही लिथोट्रिप्सी मशीन

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अंबाला कैंट के नागरिक अस्पताल के आईपीडी ब्लॉक में लिथोट्रिप्सी मशीन के कमरे में लगा ताला: संवाद - फोटो : अंबाला कैंट के नागरिक अस्पताल के आईपीडी ब्लॉक में लिथोट्रिप्सी मशीन के कमरे में लगा ताला: संवाद
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अंबाला। नागरिक अस्पतालों में साढ़े तीन-तीन करोड़ रुपये से खरीदी एक्सट्रॉकोर्पोरियल शॉक वेव लिथोट्रिप्सी (ईएसडब्ल्यूएल) मशीनें धूल फांक रही हैं। इनमें से एक मशीन छावनी के नागरिक अस्पताल में भी पिछले डेढ़ साल से बंद है।
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गुर्दे की पत्थरी को बिना चीर-फाड़ के निकालने के लिए खरीदी इस मशीन का लाभ नहीं मिल रहा है। एक साल से यह मशीन आईपीडी ब्लॉक के रूम नंबर 318 में बंद है। जबकि अस्पताल में सर्जन की ओपीडी में अंबाला के अलावा कुरुक्षेत्र से भी मरीज उपचार कराने के लिए आते हैं।
मजबूरन डॉक्टर इस मशीन के इस्तेमाल की जगह दूरबीन वाली मशीन के जरिये ही ऑपरेशन कर रहे हैं। अस्पताल स्टाफ और डॉक्टरों का तर्क है कि यह मशीन यूरोलॉजिस्ट डाॅक्टर के अभाव में बंद थी। जबकि अब अंबाला कैंट में कांट्रेक्ट बेस पर यूरोलॉजिस्ट भी उपलब्ध हो गए हैं।
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पांच साल तक चलती रही मशीन
छावनी के नागरिक अस्पताल के अलावा प्रदेश के दूसरे अस्पतालों में भी साढ़े तीन-तीन करोड़ रुपये की लागत से उपलब्ध कराई थी। छावनी में यह मशीन चार मार्च 2019 में लगाई थी। पांच साल तक संबंधित प्राइवेट कंपनी की तरफ से इस मशीन की मरम्मत का जिम्मा संभाला था। उस समय तक तो मशीनों का लाभ मिल रहा था। अब वो बंद होने के कारण यह मशीन बंद हो गई है। ऐसे में मजबूरन मरीजों को प्राइवेट अस्पताल में 10 से 20 हजार रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।


दूसरे सर्जन भी ऑपरेट के लिए ट्रेंड
ईएसडब्ल्यूएल मशीन के लिए तर्क दिया जाता है कि यूरोलॉजिस्ट ही ऑपरेट करेंगे। जबकि स्वास्थ्य विभाग की तरफ से अस्पताल में दूसरे सर्जन को भी ट्रेनिंग देकर मशीन का इस्तेमाल बताया है। अंबाला कैंट के नागरिक अस्पताल की बात करें तो पहले हर सप्ताह एक दिन सात से आठ का इसी मशीन से उपचार किया जाता था।


ऐसे काम करती है ये मशीन

ईएसडब्ल्यूएल में लिथोट्रिप्टर नामक मशीन होती है जो बेहोशी के हालत में लेटे मरीज की किडनी स्टोन को मशीन में एक्स-रे से केंद्रित किया जाता है। इसके बाद शॉक तरंगें त्वचा और उत्तकों से पत्थरी तक जाती है और उसके टुकड़े कर देती है। इसके बाद यह टुकड़े कुछ सप्ताह में पेशाब के जरिए शरीर से बाहर निकल जाते हैं।



वर्जन
लिथोट्रिप्सी मशीन महंगी मशीन है। आखिर मशीन क्यूं नहीं चला जा रही है। इसके लिए मुख्यालय स्तर पर पत्राचार किया जाएगा। जल्द से जल्द इस मशीन को चलाया जाएगा, जिससे कि मरीजों को लाभ मिले सके।
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डॉ. राकेश सहल, सिविल सर्जन, अंबाला
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