संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला सिटी। श्री कल्याण कमल आश्रम हरिद्वार के महामंडलेश्वर स्वामी कमलानंद गिरि महाराज ने कहा कि भगवद्गीता का पाठ, गंगाजल से स्नान एवं पान ये दोनों ही मनुष्य को पुनर्जन्म के बंधन से मुक्त करने वाले हैं।
गीता को कानों से पीना चाहिए और गंगाजल को मुख से। जिसने गंगा और गीता का सेवन कर लिया, वह पुनर्जन्म से बच गया। कमलानंद गिरि महाराज ने ये विचार प्राचीन श्री रघुनाथ मंदिर में आयोजित भगवद्गीता प्रवचन कार्यक्रम के पांचवें दिन व्यक्त किए।
उन्होंने गंगाजल की महिमा बताते हुए एक प्रेरक प्रसंग सुनाया कि एक बार एक सर्प गंगाजल पी रहा था। उसी समय गरुड़ महाराज वहां पहुंचे और सर्प को पकड़ लिया, जैसे ही सर्प के प्राण निकलने वाले थे, वह चतुर्भुज भगवान विष्णु के रूप में प्रकट हो गए। गरुड़ महाराज के आश्चर्य करने पर उस सर्प ने बताया कि उसने गंगाजल का पान किया था। इस प्रसंग से यह सिद्ध होता है कि गंगा और गीता दोनों ही अत्यंत पावन और मोक्षदायिनी हैं।
इस अवसर पर स्वामी सुशांतानंद ने भी श्रद्धालुओं को प्रवचनों की अमृतवर्षा में स्नान कराया और भजन-कीर्तन से वातावरण को भक्तिमय बना दिया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर महाराज से आशीर्वाद प्राप्त किया और अपने जीवन को धन्य बनाया।
अंबाला सिटी के श्री रघुनाथ मंदिर में कथा श्रवण करते भक्त। प्रवक्ता- फोटो : संवाद