हिसार बरवाला से पूर्व विधायक रेलू राम पुनिया उनकी पत्नी और परिवार के 6 सदस्यों को मौत के घाट उतारने वाले हत्या के दोषी संजीव को एसटीएफ अंबाला ने रविवार रात मेरठ से धर दबोचा। 45 वर्षीय हत्या का दोषी संजीव उर्फ ओंकार उर्फ ओमनंद गिरी सहारनपुर लक्ष्मणपुरी कालोनी का रहने वाला है। जिसे रविवार की रात अंबाला एसटीएफ ने मेरठ नेशनल हाईवे पर यूवी क्लब के पास से गिरफ्तार किया। दोषी को मंगलवार को बिलासपुर कोर्ट में पेश किया जाएगा। एसटीएफ की शुरुआती पूछताछ में संजीव ने बताया कि वह गुजरात, पंजाब और उत्तरप्रदेश के डेरों में जाकर साधू बनकर छिपता था। इतना ही नहीं 2018 से अब तक वह विभिन्न तीर्थ स्थल, मंदिर और धर्मशालाओं में ही रहकर पुलिस को चमका देते रहा है।
बेटी और दामाद ने मिलकर उतार दिया था 8 लोगों को मौत के घाट
दरअसल सहारनपुर का रहने वाला संजीव स्पोर्ट्स मीट में हिस्सा लेने के लिए 1997 में लखनऊ गया था। वहीं पर संजीव की मुलाकात हिसार निवासी सोनिया हुई, जोकि तत्कालीन विधायक रेलू राम पुनिया की बेटी थी। सोनिया भी स्पोर्ट्स मीट में हिस्सा लेने के लिए अपनी मां कृष्णा के साथ वहां पहुंची थी। यह मुलाकात प्यार में तब्दील हो गई और दोनों इसके बाद 29 सितंबर 1998 में शादी कर ली। संजीव के अनुसार उसके ससुर रेलू राम पुनिया हरियाणा विधानसभा क्षेत्र हिसार बरवाला से विधायक थे। संजीव के अनुसार पत्नी सोनिया का मायके पक्ष से कलह चल रही थी। इसी कारण 24 अगस्त 2001 में दोनों ने मिलकर ससुर रेलू राम पुनिया और पत्नी कृष्णा, साला सुनील उसकी पत्नी शकुंतला, बेटी प्रियंका, 4 साल के पोते लोकेश, ढाई साल की पोती शिवानी और डेढ़ महीने की प्रीति की तेजधार हथियार से हत्या कर दी थी। इस मामले में हिसार के उकलाना थाने में आर्म्स एक्ट के तहत हत्या का केस दर्ज किया गया था। इसमें संजीव और उसकी पत्नी सोनिया के अलावा माता-पिता, भाई, दो मामा, मामे के लड़के और दो चाचा को पुलिस ने 2001 में गिरफ्तार किया था। 31 मई 2004 को हिसार की अदालत ने सोनिया और संजीव को फांसी की सजा सुनाई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने फांसी को किया था उम्रकैद में तब्दील
इसके बाद पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में संजीव और सोनिया की ओर से याचिका डाली गई थी, जोकि मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया। संजीव के अनुसार में सजा का समय अंबाला, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, झज्जर, रोहतक और फरीदाबाद में काटा। जिला अंबाला में रहते हुए कैदियों के साथ मिलकर अंबाला जेल में वर्ष 2008 में जेल में सुरंग बनाने की साजिश की थी, जोकि असफल हो गई। यहां से इसके बाद उसे कुरूक्षेत्र जेल में शिफ्ट कर दिया गया। वहां से वर्ष 2018 में यमुनानगर के चंगनौली के फर्जी पते पर पैरोल पर आया, लेकिन वापस जेल न जाकर फरार हो गया। इस बारे में बिलासपुर थाने में केस दर्ज किया गया था।
पैरोल से फरार संजीव को मेरठ से पकड़ा गया है। वह अपना नाम बदलकर ओमगिरी उर्फ ओंकार के नाम से साधू बनकर गुजरात, पंजाब और उत्तरप्रदेश में रहकर पुलिस को गुमराह कर रहा था। रेलू राम पुनिया हत्याकांड में संजीव और उसकी पत्नी सोनिया को फांसी की सजा हुई थी। आरोपी से पूछताछ जारी है।
- कुलभूषण, डीएसपी एसटीएफ अंबाला।