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लोकसभा चुनाव : भाजपा में घमासान, दावेदारों की फौज बढ़ीं

Fri, 10 Jan 2014 12:28 AM IST
अंबाला
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लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा के दावेदारों ने कसरत तेज कर दी है। भाजपा में टिकट के लिए घमासान तेज होता जा रहा है।

एक सीट के लिए अब तक सात दावेदार सामने आ चुके हैं। सभी दावेदारों ने अपना आवेदन हाईकमान को भेज दिया है। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष, प्रदेश प्रभारी और प्रदेश के संगठन सचिव की संस्तुति के बाद दावेदारों का पैनल पार्टी के केंद्रीय संगठन को भेजा जाना है।

भाजपा के सभी दावेदार जहां खुद को जनता के ही बीच का नेता बता रहे हैं, वहीं अपने अनुभव के दम पर वे खुद को चुनावाें के लिए बिल्कुल योग्य व्यक्ति बता रहे हैं। उल्लेखनीय है कि चुनावों हलचल से पहले तीन नाम ही चर्चाओं में चल रहे थे, मगर अब टिकट के लिए भाजपा के सात चेहरे सामने आ चुके हैं। एक  दावेदार ने तो वीरवार को ही अपनी ताल ठोकी है।
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रतनलाल कटारिया : अंबाला से सांसद रह चुके हैं और वर्तमान में प्रदेश उप प्रमुख की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। 2004 और 2009 में सांसद सैलजा के खिलाफ चुनाव लड़ा था। पहली बार सवा दो लाख वोट से दूसरी बार करीब साढ़े चौदह हजार वोट से हारे।

बंतो कटारिया : अंबाला के पूर्व सांसद रतनलाल कटारिया की पत्नी और महिला विंग की प्रदेश उपाध्यक्ष रह चुकी हैं। रतनलाल कटारिया के नामांकन के समय वे ही कवरिंग प्रत्याशी रही। अब भी अपने पति के साथ खुद को मजबूत दावेदार बता रही हैं।

अरुण कुमार : अंबाला के पूर्व सांसद, उत्तरप्रदेश और हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल सूरजभान के बेटे हैं। युवा भाजपा नेता है और राष्ट्रीय अनुसूचित इकाई का सदस्य रह चुके हैं। मुलाना से विधानसभा का चुनाव लड़ चुके हैं, लेकिन हार गए थे। अब खुद को अंबाला से टिकट की दावेदारी जता रहे हैं।

दयाल सिंह पिंजौरी : अंबाला के पूर्व सांसद और राज्यपाल रहे सूरजभान के दामाद है। खुद को पार्टी का सक्रिय कार्यकर्ता होने के नाते अंबाला लोकसभा सीट सेे प्रबल दावेदार बताते हैं।

मोहन लाल बग्गन : आरएसएस के सक्रिय कार्यकर्ता है और संघ की गतिविधियों में ही आगे रहते हैं। भाजपा में एससी मोर्चा के  पदाधिकारी भी है और अब लोकसभा सीट की टिकट के लिए ताल ठोक रहे हैं।

राजेश बतौर : नारायणगढ़ के युवा भाजपा नेता है और पार्टी की अनुसूचित मोर्चा इकाई के महासचिव भी है। भारी युवा समर्थन का दावा करते हुए टिकट के लिए मैदान में हैं।

एडवोकेट सत्यव्रत भोसले : हाईकोर्ट में वकील है और शहजादपुर निवासी है। 1993 से आरएसएस के कर्मठ कार्यकर्त्ता होने का दावा करते हैं। एडवोकेट भौंसले दावा करते हैं अंबाला, नारायणगढ़ व पंचकूला के  अधिकतर वकीलों का समर्थन उनके साथ है।

पैराशूट प्रत्याशी की चरचा जोरों पर
अंबाला लोकसभा सीट के लिए बढ़ते दावेदारों को देखते हुए इस वक्त अंबाला में पैराशूट प्रत्याशी की भी चरचा जोरों पर है। भाजपा में ये  चरचा जोरों पर शुरू हो गई है कि पार्टी अंबाला में पूर्व केंद्रीय मंत्री अशोक प्रधान को भी मैदान में उतार सकती है। हालांकि अभी इस बात की पुष्टि नहीं है, लेकिन यहां अंबाला में अशोक प्रधान के नाम की चरचा पार्टी में काफी तेज हो गई है।
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अशोक प्रधान  खुर्जा से चार बार 1994 से 2009 तक सांसद रह चुके हैं, जबकि अटल सरकार में टेलीकॉम, फूड एंड सप्लाई, लेबर और एचआरडी मंत्री रह चुके हैं।

वर्ष 2009 में बुलंदशहर से वे हार गए थे। उधर, ‘अमर उजाला’ को पूर्व मंत्री अशोक प्रधान ने बताया कि उन्होंने किसी भी सीट से दावेदार नहीं जताई है और टिकट का फैसला पूरी तरह से पार्टी हाईकमान पर छोड़ रखा है। पार्टी कहेगी तो अंबाला से चुनाव लड़ लूंगा, यदि पार्टी कहीं और से चुनाव लड़ाएगी, तो वहां से लड़ लेंगे।
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