संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। मंडल के कमिश्नर संजीव वर्मा ने जमीन की रजिस्ट्री और रिकॉर्ड में वर्षों से चली आ रही विसंगतियों को दूर करने का फैसला लिया है। कमिश्नर ने हरियाणा भू-राजस्व अधिनियम, 1887 की धारा 32 के तहत शक्तियों का प्रयोग करते हुए मंडल के राजस्व रिकॉर्ड (जमाबंदी) के विशेष संशोधन के आदेश जारी किए हैं।
इस आदेश का सबसे बड़ा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो जमीन खरीद तो लेते थे, लेकिन उनका नाम मालिकाना हक (कॉलम नंबर 4) के बजाय केवल खाना काश्त (कॉलम नंबर 5) में ही दर्ज रह जाता था। प्रशासन ने अब इस शॉर्टकट को पूरी तरह बंद कर दिया है।
अब यदि किसी खरीदार का नाम केवल खाना काश्त (खेती/कब्जा कॉलम) में दर्ज है, तो उसे सुधार कर कॉलम नंबर 4 (मालिकाना हक) में सह-साझेदार के रूप में दर्ज किया जाएगा, जैसे ही खरीदार का नाम मालिकाना हक में आएगा, जमीन बेचने वाले (विक्रेता) का हिस्सा रिकॉर्ड से काट दिया जाएगा। यदि किसी मालिक ने अपनी कुल जमीन से ज्यादा हिस्सा अलग-अलग लोगों को बेच दिया है, तो पहले आओ, पहले पाओ योजना के आधार पर केवल वास्तविक उपलब्ध हिस्से तक ही म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) मान्य होगा।
जमाबंदी पुनरीक्षण का रियल एस्टेट एसोसिएशन ने किया स्वागत
हरियाणा सरकार द्वारा जमाबंदी (अधिकार अभिलेख) के विशेष पुनरीक्षण की अधिसूचना का रियल एस्टेट एंड बिल्डर्स एसोसिएशन ने स्वागत किया है। एसोसिएशन के मुख्य संरक्षक ओंकार नाथ परुथी ने इसे ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि इससे मालिकाना हक और खाना-काश्त की वर्षों पुरानी विसंगतियां दूर होंगी। परुथी ने कहा कि अस्पष्ट रिकॉर्ड के कारण निवेशक और किसान लंबे समय से कानूनी विवाद झेल रहे थे। इस सुधार से रजिस्ट्री व्यवस्था पारदर्शी होगी और धोखाधड़ी पर लगाम लगेगी। उन्होंने प्रशासन से इस प्रक्रिया को सरल और समयबद्ध तरीके से लागू करने की मांग की है, ताकि आम जनता को असुविधा न हो। एसोसिएशन ने सरकार को इस कार्य में पूर्ण सहयोग का भरोसा दिया है।