कुरुक्षेत्र। केयू स्थित फार्मेसी संस्थान। संवाद
कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के फार्मेसी संस्थान के शोधकर्ताओं ने कैंसर और संक्रमण जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए नई दवा विकसित करने की दिशा में अहम सफलता हासिल की है। शोधकर्ताओं ने ऐसे नए रासायनिक यौगिक तैयार किए हैं, जिन्होंने शुरुआती वैज्ञानिक परीक्षणों में अच्छे परिणाम दिए हैं। इस शोध को प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका जर्नल ऑफ मॉलिक्यूलर स्ट्रक्चर में प्रकाशित किया गया है। वहीं इस तकनीक पर विश्वविद्यालय का भारतीय पेटेंट भी प्रकाशित हो चुका है।
यह शोध फार्मेसी संस्थान की शोधार्थी डॉ. संगीता वर्मा ने एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सुखबीर लाल और गुरुग्राम विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. राकेश नारंग के मार्गदर्शन में किया है। शोध में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों ने भी सहयोग दिया।
संस्थान की निदेशक प्रो. नीरा राघव ने बताया कि शोध के दौरान तैयार किए गए नए रासायनिक यौगिकों की प्रयोगशाला में जांच की गई। इनमें बैक्टीरिया से होने वाले संक्रमण को रोकने और कैंसर कोशिकाओं की बढ़त को धीमा करने की क्षमता के उत्साहजनक संकेत मिले हैं। हालांकि इन यौगिकों पर अभी और वैज्ञानिक परीक्षण किए जाएंगे। यदि आगे के परीक्षण सफल रहते हैं तो भविष्य में इन्हें नई दवाओं के विकास का आधार बनाया जा सकता है। इस शोध की एक और बड़ी उपलब्धि यह रही कि विकसित यौगिकों पर आधारित तकनीक के लिए भारतीय पेटेंट आवेदन (संख्या 202611042946) 15 मई 2026 को प्रकाशित हो चुका है। इससे शोध की नवीनता और भविष्य में औद्योगिक उपयोग की संभावना को भी मान्यता मिली है।
आम आदमी के लिए क्यों अहम है यह शोध
- कैंसर और संक्रमण की नई दवाओं के विकास का रास्ता खुल सकता है।
-शोध में तैयार नए यौगिकों ने शुरुआती परीक्षण में अच्छे परिणाम दिए हैं।
-तकनीक पर भारतीय पेटेंट प्रकाशित होने से इसकी वैज्ञानिक उपयोगिता को भी मान्यता मिली है।
-आगे सफल परीक्षण होने पर इलाज के नए विकल्प विकसित किए जा सकते हैं।
कुरुक्षेत्र। केयू स्थित फार्मेसी संस्थान। संवाद