अंबाला सिटी। दिल्ली अमृतसर हाईवे पर स्थित शंभू बार्डर से दूसरे दिन भी किसानों ने पुलिस से संघर्ष करते हुए अपना रास्ता बनाया। वीरवार के मुकाबले शुक्रवार को शंभू बॉर्डर पर किसानों की संख्या लगभग आधी थी परंतु इसके बाद भी किसानों के हौसलों के आगे पुलिस के बंदोबस्त बौने पड़ गए। जबकि पुलिस द्वारा वीरवार की स्थिति को देखते हुए शुक्रवार को किसानों को रोकने के लिए अधिक व्यवस्था की गई थी। पुलिस ने पुल के बीचोंबीच 7 फुट ऊंचे बड़े-बड़े पत्थर लगाकर रास्ता पूरी तरह से बंद कर रखा था ताकि किसान चाहकर भी हरियाणा में प्रवेश न कर सकें। वाटर कैनन से भी खूब पानी की बौछार की पर किसानों पीछे नहीं हटे।
पत्थरों को हटाते हुए अपना रास्ता बनाया। शुक्रवार दोपहर करीब 12 बजे एक पुल से दूसरे पुल की तरफ बढ़े किसानों ने सबसे पहले पुलिस द्वारा रखे गए लगभग 7 बैरिकेड को घग्गर नदी पुल से नीचे पानी में फेंका। इसके बाद किसानों को 7 फुट ऊंचे पत्थरों को हटाने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा। किसानों ने स्पेशल चेन और ट्रैक्टर मंगवाए फिर पत्थर को जंजीर से बांधकर खींचते हुए रास्ता साफ किया। इस बीच पुलिस ने आंसू गैस के गोलों की बरसात कर दी, परंतु पहले से इंतजाम करके गए हुए किसानों ने आंसू गैस के गोलों का सामना करते हुए अपने संघर्ष को जारी रखा। इसके बाद जैसे ही पहला पत्थर हटा तो पुलिस भी बिना किसी देरी के पीछे हट गई और किसानों के लिए रास्ता साफ कर दिया। लगभग 2 बजे किसान हरियाणा में प्रवेश के साथ दिल्ली के लिए कूच कर गए।
मूक दर्शक बनी रही पुलिस
शंभू बॉर्डर पर हुए संघर्ष में शुक्रवार को पुलिस ने केवल मूक दर्शन की भूमिका निभाई। इस दौरान केवल वाटर कैनन और आंसू गैस के गोले छोड़ने वाले कर्मचारियों ने काम किया। जबकि अन्य पुलिस बल बैरिकेड के पास खड़ा होकर किसानों द्वारा पुलिस द्वारा किए गए इंतजामों को ध्वस्त होता देखता रहा। इस बीच एक बार डीएसपी सुल्तान सिंह दूसरे पुल पर खड़े 4 किसानों को समझाने की कोशिश की परंतु तब तक किसान अपना रास्ता बना चुके थे।
kisan protest- फोटो : Ambala
kisan protest- फोटो : Ambala