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खड्गा स्टेडियम बना एतिहासिक पलों का गवाह जब ताजा हो गई 1971 युद्ध की यादें

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मंच पर शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए - फोटो : Ambala
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छावनी का खड्गा स्टेडियम वीरवार को एक और एतिहासिक पल का गवाह बन गया। विजय ज्योति के बाद जब 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में शहीद हुए जवानों सलामी दी गई तो मौके पर मौजूद जवानों में नया जोश भर गया। इसी दौरान जब विजय ज्योति के समक्ष वीर योद्धाओं के हौसले और जज्बों को याद किया गया तो सेनानिवृत्तों के परिजनों सहित जवानों की आंखें तक नम हो गईं। इस मौके को यादगार बनाने के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रम ने माहौल को खुशनुमा कर दिया।
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जवानों ने एक के बाद एक भंगड़ा, महाराष्ट्र के नृत्य सहित लेजियम नृत्य, गोरखा रेजीमेंट के खुखरी डांस ने समा बांध दिया। साथ ही देशभक्ति के गीतों के साथ-साथ मंच पर भी गायकों ने भी प्रस्तुति दी। सलामी देने के साथ-साथ जहाज कार्यक्रम स्थल के ऊपर से गुजरे। मंच पर 1971 के युद्ध में अहम भूमिका निभाने वाले पांच सेवानिवृत्त जवानों ने भी युद्ध से जुड़ी दास्तां सुनाई। समारोह में 1971 के युद्ध में अदम्य साहस दिखाने वाले वीर चक्र विजेता रिटायर्ड लै. जरनल रणजीत सिंह, रिटायर्ड ले. जनरल केएस. डोगरा, सूबेदार सेवा सिंह, आर्नरी कैप्टन राम सिंह, अजीत कौर पत्नी स्वर्गीय मेहर सिंह सहित अन्य वीरांगनाओं को भी इस अवसर पर सम्मानित किया गया।
घुड़सवार दस्ते की अगुवाई में विजय ज्योति को किया रवाना
खड्गा स्टेडियम में विजय मशाल की घुड़सवार दस्ते की अगुवाई में घुमाया गया। स्वर्णिम विजय मशाल को मेजर सुमित सिंह यहां लेकर पहुंचे और जीओसी खड्गा कौर कमांडर एसएस महल को सौंपा। सेना के जवानों द्वारा शहीदों को सलामी शस्त्र के द्वारा श्रद्धांजलि दी गई। करीब डेढ़ घंटे तक चले कार्यक्रम की समाप्ति से पहले ही विजय ज्योति को पटियाला के रवाना कर दिया।
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1971 का युद्ध इतिहास की सबसे बड़ी जीत : एसएस महल
खड्गा कौर कमांडर एसएस महल ने कहा कि सन 1971 के युद्ध में थल और वायुसेना के द्वारा जो तालमेल दिखाया गया वह आज भी हमारे लिए मिसाल है। अगले वर्ष खड्गा कौर का स्वर्णिम वर्ष मनाया जाएगा। यह जीत हिंदुस्तान के इतिहास की सबसे बड़ी जीत थी। 13 दिनों तक चले युद्ध में भारतीय सेना ने पाक को खदेड़ दिया तथा पाकिस्तान के करीब 93000 सैनिकों ने आत्मसमर्पण कर दिया था।
दुश्मन सामने, नहीं हटूंगा...कैप्टन विक्रम की कहानी ने झंझोरा
कार्यक्रम में शहीदों को याद किया गया तो जवानों में जोश भर आया। जब बताया गया कि शहीद सैनिक कैप्टन विक्रम बत्रा ने तोलोलिंग की हाइट पर कब्जा पाने के बाद कहा था ये दिल मांगे मोर। इतना ही नहीं मेजर सोमनाथ शर्मा जिनका 1947 की जंग में लास्ट मैसेज आया था दुशमन हमारे से 50 गज दूर है और बहुत ज्यादा संख्या में है लेकिन मैं अपनी पोजीशन से नहीं हटूंगा, मैं आखिरी गोली और आखिरी सैनिक तक लड़ता रहूंगा। इसके अलावा कई जवानों को याद किया।
यह रहे कार्यक्रम में मौजूद
अनिल चौधरी मेजर जनरल सेना मैडल जीओसी, पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश सब एरिया व एयर कमांडोर डीएस जोशी एओसी अंबाला एयरफोर्स स्टेशन और उपायुक्त अशोक कुमार शर्मा और सेवानिवृत्त ले. जरनल रणजीत सिंह व ले. जनरल केएस डोगरा, ब्रिगेडियर एमएस तोमर, सूबेदार सेवा सिंह, कौर ऑफ इंजीनियर राम सिंह, खड्गा कौर ऑफिसर, जेसीओ, जवान एवं सैन्य अधिकारी, भूतपूर्व सैनिक, वीर नारी सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
फाइटर प्लेन और मालवाहक जहाज भी रहे आकर्षण का केंद्र
स्वर्णिम विजय दिवस के अवसर पर एयरफोर्स ने भी अहम भूमिका निभाई। जहां पहले तीन फाइटर प्लेन सलामी देते हुए गुजरे तो वहीं कार्यक्रम के शुरू होने से आखिरी समय तक फाइटर प्लेन के अलावा मालवाहक जहाज भी कार्यक्रम स्थल यानी खड्गा मैदान के ऊपर से गुजरते हुए नजर आए। इस नजारे को देखकर हर किसी की आंखें आसमान पर ही अटकी हुई थी।
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