करनाल। शहर और आसपास के जिलों में वायु प्रदूषण लगातार गंभीर होता जा रहा है। ताजा आंकड़ों के अनुसार पानीपत से चंडीगढ़ के बीच सबसे ज्यादा प्रदूषित हवा करनाल में दर्ज की गई है। करनाल का एक्यूआई 240 पहुंच गया, जो बेहद खराब श्रेणी की ओर बढ़ने का संकेत दे रहा है। इसके बावजूद शहर में निर्माण कार्यों पर रोक-टोक नहीं दिख रही, जबकि एनसीआर में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने एनसीआर क्षेत्र में ग्रेप-3 लागू कर रखा है।
रविवार को अंबाला का एक्यूआई 224, चंडीगढ़ का 198, करनाल का 240, कुरुक्षेत्र का 193, पानीपत का 216, पंचकूला का 131, सोनीपत का 278, यमुनानगर का 197, जींद का 192 दर्ज किया गया। दिल्ली से लेकर चंडीगढ़ तक सोनीपत और करनाल दोनों ही जिले सबसे गंभीर स्थिति में हैं। वहीं पंचकूला अपेक्षाकृत बेहतर हवा दर्ज कर रहा है। फिलहाल शहर की हवा की स्थिति चिंताजनक दिखाई दे रही है।
दूसरी ओर प्रदूषण कम करने के लिए तैयार की गई योजनाओं को अमल में लाने में जिला प्रशासन और नगर निगम गंभीर नहीं दिखते। नगर निगम की ओर से प्रदूषण नियंत्रण के लिए आवश्यक एंटी-स्मॉग गन अब तक नहीं खरीदी गई, जबकि सड़कों पर उड़ती धूल को नियंत्रित करने के लिए यह सबसे उपयोगी उपकरण माना जाता है। साथ ही, सड़क से धूल उठाने वाली मशीन भी शहर में मौजूद है, मगर उसका कोई व्यापक फायदा शहरवासियों को नहीं मिल पाया। कई मार्गों पर धूल की मोटी परतें आज भी वैसे ही उड़ रही हैं।
निर्माण कार्यों पर नियमों की अवहेलना
ग्रेप-3 लागू होने के बाद निर्माण स्थल पर कवर लगाना, पानी का छिड़काव, मलबे का सुरक्षित निस्तारण और परिवहन के दौरान ढककर ले जाना अनिवार्य है। जबकि शहर और आसपास के क्षेत्रों में इनमें से अधिकांश नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। शहर के कई स्थानों पर खुली मिट्टी-खाद, अनकवर्ड निर्माण सामग्री और लगातार दौड़ते वाहन धूल के बड़े-बड़े गुबार खड़े कर रहे हैं।
शहर की हवा में पीएम 2.5 और पीएम 10 कणों की मात्रा सामान्य से कई गुना अधिक दर्ज की गई। पीएम 2.5 के सूक्ष्म कण शरीर में गहराई तक पहुंचकर फेफड़ों और दिल पर गंभीर असर डालते हैं। इस स्तर की हवा में बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों के लिए बाहर रहना खतरनाक हो सकता है।
वर्जन:
शहर में चल रहे निर्माण कार्याें को रोकने के लिए नगर निगम, एचएसवीपी और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से लगातार सर्वे किया जा रहा है। अगर कहीं कोई अवैध तरीके से निर्माण करता मिला तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- रणदीप सिंधू, एसडीओ, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड