छावनी के वार हीरोज स्टेडियम के बॉक्सिंग रिंग से शुरू हुआ था दो बेटियों का सफर
उभरती प्रतिभा-
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। छावनी के वार हीरोज स्टेडियम के बॉक्सिंग रिंग से शुरू हुआ दो बेटियों का सफर आज सात समंदर पार देश का मान बढ़ा रहा है। छावनी की कल्पना लांबा और शाहपुर की हरनूर कौर ने मेहनत और जज्बे के दम पर अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाजी में वो मुकाम हासिल किया है, जो आज बेटियों के लिए मिसाल बन चुका है। साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाली इन बेटियों ने साबित कर दिया कि अगर इरादे फौलादी हों तो आसमान छूना मुश्किल नहीं।
आयरलैंड में 51 किग्रा में जीता स्वर्ण पदक
बॉक्सिंग कोच संजय कुमार ने बताया कि कंटोनमेंट बोर्ड में चालक की बेटी कल्पना लांबा आज अंतरराष्ट्रीय बॉक्सिंग का सितारा हैं। कल्पना ने नवंबर 2025 में आयरलैंड में आयोजित सीनियर चैंपियनशिप में प्रतिद्वंद्वी को हराकर स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया था। इससे पहले उन्होंने यूएई में आयोजित जूनियर एशियन चैंपियनशिप में भी स्वर्ण पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया था। वर्तमान में कल्पना रोहतक स्थित नेशनल बॉक्सिंग अकेडमी में अभ्यास कर रही हैं।
चीन में झटका स्वर्ण पदक
शाहपुर के किसान परिवार की बेटी हरनूर ने चीन में आयोजित बेल्ट एंड रोड यूथ बॉक्सिंग गाला अंडर-17 में स्वर्ण पदक जीता। अगस्त 2025 में हुए इस मुकाबले में हरनूर ने चीन, कोरिया और उज्बेकिस्तान जैसे दिग्गजों को पीछे छोड़ते हुए 66 किग्रा भार वर्ग में खिताबी जीत दर्ज की। इसके अलावा उन्होंने बहरीन में आयोजित यूथ एशियन गेम्स में रजत पदक जीतकर प्रदेश का नाम रोशन किया। फिलहाल हरनूर पुणे के आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट में पसीना बहा रही हैं।
कोच बोले- बेटियों ने बढ़ाया जिले का मान
बॉक्सिंग कोच संजय कुमार के अनुसार, दोनों खिलाड़ियों की सफलता के पीछे वर्षों की कड़ी तपस्या है। हरनूर का चयन 2025 में आयोजित छठी जूनियर नेशनल बॉक्सिंग चैंपियनशिप के प्रदर्शन के आधार पर भारतीय टीम में हुआ था। कोच ने कहा कि अंबाला की ये बेटियां अब ओलंपिक जैसे बड़े मंचों के लिए खुद को तैयार कर रही हैं।
कल्पना लांबा अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज। स्वयं