फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Ambala News: जेईई एडवांस में जसलीन कौर ने पाई 4742वीं रैंक, रिवीजन पर दिया ध्यान

विज्ञापन
अंशुल अपने पिता के साथ।
विज्ञापन
- संयुक्त प्रवेश परीक्षा के परिणाम में होनहारों ने अपनी प्रतिभा का मनवाया लोहा
विज्ञापन




माई सिटी रिपोर्टर



अंबाला सिटी। संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई एडवांस) के परिणाम में होनहारों ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। जिले के विद्यार्थियों ने न केवल उच्च रैंक हासिल कर जिले का नाम भी रोशन किया। इसमें अंबाला सिटी से जसलीन और अंबाला कैंट के अंशुल ने अच्छी रैंक हासिल की है। हालांकि अन्य विद्यार्थियों ने 17 हजार के आसपास रैंक हासिल की है। इन मेधावियों ने सोमवार को परिणाम आने के बाद सफलता की कहानियां साझा की हैं। उन्होंने सोशल मीडिया से दूरी, रिवीजन पर विशेष ध्यान और पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों का गहन अभ्यास। किसी ने 12 से 13 घंटे की पढ़ाई को अपनी सफलता का मंत्र बताया, तो किसी ने कोचिंग के साथ-साथ सेल्फ-स्टडी और खुद को छोटे लक्ष्य देने को जीत की चाबी माना।



मोबाइल से बनाई दूरी, रिवीजन पर दिया जोर

बलदेव नगर के पास बरनाला गांव की रहने वाली जसलीन कौर ने जेईई एडवांस परीक्षा में जिला में सर्वाधिक अंक प्राप्त किए हैं। उन्होंने 4742वीं रैंक हासिल की है। इससे पहले जेईई मेंस की परीक्षा में जसलीन ने 99.83 परर्सेंटाइल प्राप्त कर माता पिता व शिक्षकों का नाम रोशन किया था। उन्होंने बताया कि अब उन्हें टॉप आईआईटी में दाखिला आसानी से मिल जाएगा। वहीं वह कंप्यूटर या इलेक्ट्रिकल क्षेत्र में करियर बनाएंगी। जसलीन बताती हैं कि वह भविष्य में इंजीनियरिंग कर यूपीएससी के लिए प्रयास करेंगी। यूपीएससी पास करना सपना है। जसलीन ने जेईई के लक्ष्य को पाने के लिए कोचिंग और घर पर पढ़ाई दोनों को महत्ता दी। उन्होंने रिवीजन पर भी जो दिया। इसके साथ ही मोबाइल फोन से दूरी ने उन्हें लक्ष्य से भटकने नहीं दिया। जसलीन के पिता गुरप्रीत सिंह प्राइवेट कंपनी में मैनेजर हैं तो माता बलजिंदर कौर भी नौकरीपेशा हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन






भाई ने किया मार्गदर्शन



कैंट के डिफेंस कॉलोनी निवासी अंशुल कुमार ने जेईई एडवांस परीक्षा में 5744 रैंक प्राप्त की है। उन्होंने बताया कि वह 11वीं से ही इस परीक्षा की तैयारी में जुटे थे। आर्मी पब्लिक स्कूल से पढ़ाई और कोचिंग करने के बाद वह घर पर भी उतना ही ध्यान देते थे। उनके भाई कुनाल कुमार पहले से ही आईआईटी दिल्ली में पढ़ रहे हैं। उन्होंने भी मार्गदर्शन किया। दिनभर में 12 से 13 घंटे की पढ़ाई में उन्होंने यह मुकाम पाया। अंशुल ने बताया कि उनके पिता कृष्ण पाल सेना में हवलदार पद से सेवानिवृत्त हैं तो माता सुदेश गृहिणी हैं।

अंशुल अपने पिता के साथ।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें