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मानसिक शांति के लिए अध्यात्म की शरण में आना जरूरी : स्वामी ज्ञानानंद

Sun, 04 Jan 2026 01:19 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
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कुरुक्षेत्र।  गीता ज्ञान संस्थानम् स्थित श्री कृपा बिहारी मंदिर में प्रवचन सुनते श्रद्धालु। विज
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कुरुक्षेत्र।
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लौकिक कमाई भौतिक सुख साधन तो दे सकती है लेकिन मानसिक शांति नही दे सकती। मानसिक शांति पाने के लिए अध्यात्म की शरण में आना जरूरी है। गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद गत देर रात्रि गीता ज्ञान संस्थानम् स्थित श्री कृपा बिहारी मंदिर परिसर में दीक्षित एवं समर्पित परिवारों की नव वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित बैठक में ये प्रवचन दिए। बैठक का शुभारंभ गीता पाठ से किया गया।

गीता मनीषी ने बताया कि श्री कृपा बिहारी जी के मंदिर में वृंदावन राधा बल्लभ मंदिर की तर्ज पर खिचड़ी उत्सव आयोजित किया जाएगा। प्रात: साढे छह से साढे सात बजे तक खिचड़ी उत्सव का आयोजन होगा। उन्हाेंने कहा कि नववर्ष में ईर्ष्या एवं कड़वाहट को छोड़कर प्रभु के नाम का जाप, विश्वास और सदभावनाओं के साथ प्रवेश करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ी को सनातन परंपराओं से जोड़े रखना जरूरी है।
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उन्हाेंने कहा कि हमें कॉन्वेंट कल्चर को छोड़कर भावी पीढ़ी को सनातन सांस्कृतिक परंपराओं से जोडऩा चाहिए। नववर्ष में प्रत्येक व्यक्ति यह संकल्प ले कि वह गीता पाठ करेगा। नाम सिमरण और पाठ से जहां आपसी मेल-मिलाप, सदभावनाएं बढ़ती होती हैं वहीं मानसिक शांति मिलती है। हमें आसुरी आदतों को छोडऩा होगा।
संसार के साधन सब कुछ दे सकते हैं लेकिन मानसिक शांति नही दे सकते। विज्ञान के पास भी मानसिक शांति के लिए कुछ नही है। मानसिक शांति केवल अध्यात्म से जुड़कर भगवान की शरण में जाने से ही मिल सकती है। आदर, प्यार और सम्मान बांटने से मिलता है। दूसरों को आदर, प्यार और सम्मान देंगे तभी हमें भी आदर और सम्मान मिलेगा। भगवान श्री कृष्ण ने गीता में अच्छे व्यवहार पर बल दिया है।
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पांच दिवसीय गीता कीर्तन चलेगा सात तक

गीता मनीषी ने बताया कि जीओ गीता द्वारा आज से गीता चिंतन शिविर का शुभारंभ किया जा रहा है जोकि सात जनवरी तक चलेगा। इस शिविर में हरियाणा, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली सहित अनेक प्रदेशों के दो सौ से अधिक विद्वान भाग ले रहे हैं। इस पांच दिवसीय शिविर में गीता जी के हर पहलु पर चिंतन किया जाएगा।
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