संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला सिटी। अंबाला शहर सेक्टर 9 के गेट नंबर तीन के साथ चल रही पितृ मोक्ष हेतु श्रीमद् भागवत कथा ज्ञानयज्ञ के पांचवें दिन कथा वाचक पंडित रोहित कृष्ण शास्त्री ने कथा का वर्णन करते हुए कहा कि जब भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ, तो उस समय वासुदेव जिस कारावास में बंद थे, उस समय उस कारावास के सभी द्वार स्वयं खुल गए और जिन बेडियों में वासुदेव बंधे हुए थे, वे स्वयं ही टूट गई।
ऐसा ही मनुष्य के साथ भी होता है, जब मनुष्य के हृदय में अकारण वरुणालय परमात्मा का प्राकट्य हो जाता है, तब उसके जीवन के सभी बंधन खुद ही खुल जाते है और मनुष्य को भगवान श्रीकृष्ण की प्राप्ति हो जाती है। कथावाचक पंडित रोहित कृष्ण शास्त्री ने कहा कि मनुष्य सांसारिक पदार्थों से आनंद की प्राप्ति करना चाहता है, जबकि आनंद की प्राप्ति भगवान के चरणों में भक्ति का भाव लगाकर व श्रीमद् भागवत का श्रद्धापूर्वक श्रवण करने ही होती है। भागवत कथा से कल्याणकारी कोई भी साधन नहीं है, इसलिए जीवन में एक बार श्रीमद् भागवत कथा अवश्य श्रवण करनी चाहिए। सभी भक्तों द्वारा भगवान को 56 भोग का प्रसाद चढ़ाया गया। कथा के समापन पर भक्तों में वह प्रसाद वितरित किया गया।
ब्रज की गोपियां साधारण नारी नहीं : शास्त्री
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अंबाला सिटी। अंबाला सिटी के पिपली बाजार स्थित शिव मंदिर के प्रांगण में दि ट्रस्ट मंदिर मूर्ति शिवाजी महाराज पिपली बाजार अंबाला शहर के तत्वाधान में चल रही श्रीमद् भागवत महापुराण की कथा महोत्सव में वृंदावन से पधारे खिलन कृष्ण शास्त्री महाराज ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भगवान श्रीकृष्ण व गोपियों की कथा सुनाई।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण व गोपियों का मिलन एक भक्ति के भाव का मिलन है, जिससे गोपियों का भगवान की शरण मिली हुई थी, ब्रज में रहने वाली गोपियां कोई साधारण नारी नहीं थी, ब्रज में बड़े-बड़े संत महात्मा, ऋषि मुनियों द्वारा कठोर तपस्या करके भी ब्रज में गोपियों जैसा वरदान उन्हे नहीं प्राप्त हुआ। श्री ठाकुर जी ने शरद पूर्णिमा की पावन रात्रि में वृंदावन में यमुना किनारे महारासलीला कर गोपियों के मनोरथ को पूर्ण किया था, जिसका व्यख्यान श्रीमद् भागवत महापुराण में दिया गया है।
वहीं भगवान श्रीकृष्ण-रुक्मणी विवाह महोत्सव की एक सुंदर झांकी निकाली गई थी, जोकि मुख्य आर्कषण का केंद्र बनी रही। इस मौके पर ट्रस्ट के सभी पदाधिकारियों ने अपने परिवारों सहित कथा में पहुंचकर कथा का खूब आनंद लिया। कथा के समापन पर सभी भक्तों ने श्रीकृष्ण-रुक्मणी जी की विशेष आरती की। इसके बाद प्रसाद वितरण किया गया।