माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला सिटी। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने हाल ही में एक इंटीरियर डेकोरेशन सेवा प्रदाता को सेवा में कमी का दोषी ठहराते हुए शिकायतकर्ता को 28,000 की राशि वापस करने और मुआवजा देने का निर्देश दिया है। आयोग ने शिकायतकर्ताओं सुरिंदर कुमार और मयंक उप्पल द्वारा इंटीरियर डेकोरेटर भारत बुद्धिराजा के खिलाफ दायर उपभोक्ता शिकायत में यह फैसला आयोग की बेंच ने सुनाया। आयोग ने फैसले में शिकायतकर्ता को 20,000 रुपये की अग्रिम राशि वापस करने, मुकदमेबाजी खर्च के तौर पर 3,000 रुपये का भुगतान करने, मानसिक उत्पीड़न के 5 हजार रुपये देने के निर्देश दिए। 45 दिनों में भुगतान न करने पर 7 प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज देना होगा।
सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने दिए तर्क
शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि अक्तूबर 2022 में इंटीरियर डेकोरेटर ने उनके घर के नवीनीकरण के दौरान 33,600 रुपये में एक टीवी कैबिनेट का निर्माण और स्थापना करने का ठेका लिया था। शिकायतकर्ता मयंक उप्पल ने 28 अक्तूबर 2022 को अग्रिम के रूप में 20,000 रुपये का भुगतान किया था। डेकोरेटर ने दिसंबर 2022 के पहले सप्ताह तक काम पूरा करने का वादा किया था, लेकिन तीन से चार महीने बीत जाने और बार-बार अनुरोध करने के बावजूद उन्होंने न तो टीवी कैबिनेट स्थापित किया और न ही अग्रिम राशि वापस की। वहीं दूसरी तरफ इंटीरियर डेकोरेटर ने मुख्य रूप से यह आपत्ति उठाई कि यह लेनदेन वाणिज्यिक उद्देश्य के लिए था, क्योंकि भुगतान एक व्यवसाय खाते से किया गया था, इसलिए शिकायतकर्ता उपभोक्ता की परिभाषा के दायरे में नहीं आते हैं और आयोग के पास क्षेत्राधिकार नहीं है। डेकोरेटर ने यह भी दावा किया कि उसने एलईडी पैनल का काम पूरा कर दिया था और उसे शिकायतकर्ताओं को सौंप दिया था, लेकिन उन्होंने इसे मनमाने ढंग से अस्वीकार कर दिया और एक नया डिजाइन मांगा।
आयोग ने खारिज की डेकोरेटर की आपत्ति
आयोग ने डेकोरेटर की आपत्ति को खारिज कर दिया। आयोग ने शिकायतकर्ताओं को उपभोक्ता माना क्योंकि उन्होंने लगातार यह दलील दी कि टीवी कैबिनेट उनके व्यक्तिगत उपयोग के लिए मंगवाया गया था। आयोग ने निष्कर्ष निकाला कि केवल व्यवसाय खाते से भुगतान करना वाणिज्यिक इरादे को स्थापित करने के लिए पर्याप्त नहीं है, खासकर जब डेकोरेटर इस बात का कोई सबूत नहीं दे सका।