अंबाला। हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर बराड़ा के विभिन्न गांव की स्वयं सहायता समूह की महिलाएं बीमा सखी बनकर जीवन को सुरक्षित बना रहीं हैं। बराड़ा में ही 40 समूह सदस्य बीमा सखी बनकर यह कार्य कर रही हैं। अकेले गांव बुडियों की हेमलता ने मानदेय के साथ एक महीने में एक लाख रुपये का कमीशन प्राप्त कर पहला स्थान पाया।
यह बीमा सखी लोगाें के घरों में जाकर बीमा के बारे में जागरूक कर अपनी आजीविका चला रही हैं। वित्तीय सहायता और बीमा जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए इन महिलाओं को तीन वर्ष तक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके साथ ही इन्हें वजीफा भी मिल रहा है। जिसमें पहले साल 7 हजार दूसरे साल 6 हजार और तीसरे साल 5 हजार रुपये दिए जा रहे है। इसके साथ ही बीमा पाॅलिसी करने पर अलग से कमीशन भी दिया जा रहा है।
पहले पशुपालन, फिर सिलाई और अब कर रहीं बीमा
बराड़ा के बुडियों गांव निवासी हेमलता ने बताया कि वह बीए द्वितीय वर्ष तक पढ़ी हैं। 2017 में वह स्वयं सहायता ग्रुप से जुड़ीं। इसके बाद उन्होंने पशुपालन शुरू किया। फिर महिलाओं के कपड़े सिलाई का काम शुरू किया। इस दौरान उन्होंने 14 ग्रुप बना दिए। इसके बाद उन्हें समूह सखी बना दिया गया। इसके बाद उन्होंने एलआईसी में पेपर दिया। पेपर पास करने के बाद उन्हें एलआईसी अधिकारियों से लक्ष्य मिला। दो महीने के अंदर ही उन्होंने लक्ष्य को पूरा किया। अब उनका सात हजार रुपये महीने का मानदेय लगा है और उन्होंने करीब एक लाख रुपये का कमीशन भी प्राप्त किया।
ठेके पर जमीन लेकर लगाई फसल
अलियासपुर निवासी पूनम बताती हैं कि वह सात साल से ग्रुप से जुडी हैं। अपने ग्रुप में वह सचिव के साथ साथ समूह सखी हैं। उन्होंने ग्रुप से जुड़कर पार्लर की दुकान, ठेके पर खेत लिए खेती की। इसके साथ ही बीमा सखी हैं। पति राजबीर सिंह मजदूरी करते हैं। वह कक्षा 12 तक पढ़ी हैं। पहले घर की स्थिति ठीक नहीं थी मगर अब उनके हाथ बंटाने से हालात बदल गए हैं।
सिलाई के काम के साथ बनी बीमा सखी
मनुमाजरा निवासी सुमन ने बताया कि वह सात साल से खुशबू ग्रुप से जुडी हैं। ग्रुप से जुड़कर सिलाई का काम शुरू किया। वह ग्रुप में खजांची के पद पर है। इसके साथ ही वह बीमा सखी हैं। उन्होंने दो महीने में मानदेय के साथ चार हजार रुपये कमीशन प्राप्त किया है।