अंबाला। हरियाणा में केबल ऑपरेटर और इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर बिजली के खंभों पर तारों का जाल बिछाकर सरकार को वित्तीय हानि पहुंचा रहे हैं। यह बात डीसी अंबाला अपने पत्र में साफ तौर पर जाहिर कर चुके हैं। बावजूद इसके प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों को अव्यवस्था का आलम नजर नहीं आ रहा।
उल्टा, इस मामले में शिकायत करने वाले शिकायतकर्ता को ही शिकायत करने का आदी बताकर शिकायत को दाखिल दफ्तर करने का फरमान सुना दिया। जबकि इन्हीं केबल ऑपरेटरों पर निगरानी रखने के लिए केंद्र मंत्रालय के बार-बार आग्रह करने पर हरियाणा सरकार ने सितंबर 2015 में केबल टेलीविजन नेटवर्क रेगुलेशन एक्ट और नियम को जमीनी स्तर पर लागू करवाने के लिए कमेटी का गठन किया था, जो 9 साल से सिर्फ कागजों में चल रही है। इस कमेटी को एक भी जिम्मेदार अफसर ने धरातल पर उतारने का प्रयास नहीं किया।
सितंबर 2015 में हुआ था पत्र जारी
दरअसल, केबल टेलीविजन नेटवर्क रेगुलेशन एक्ट और नियम की धरातल पर अनुपालना को लेकर हरियाणा सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा एक पत्र जारी करके कमेटी का गठन किया। कमेटी में राज्य सूचना, जनसंपर्क विभाग के सचिव को चेयरमैन, सोशल वेलफेयर विभाग के सचिव को सदस्य, महिला एवं बाल विकास विभाग के सचिव सहित अन्य कई विभागों के सदस्य शामिल थे। इस कमेटी का कार्य साल में एक बार बैठक करके जिलावार केबल ऑपरेटरों की रिपोर्ट सबमिट करना है और उनकी टीवी होम को लेकर दर्शकों की जानकारी भी बतानी है। यह रिपोर्ट 31 दिसंबर से पहले सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को भेजी जानी है।
आज तक कमेटी सदस्यों का चयन नहीं
सरकार द्वारा 2015 में कागजों में गठित कमेटी ने क्या कार्य किया। इसे लेकर अंबाला कैंट के क्षितिज दत्ता ने 23 अक्टूबर 2023 को एक आरटीआई लगाई। इसका क्षितिज दत्ता को 14 दिसंबर 2023 को जवाब मिला। इसमें जानकारी मिली कि आज तक इस कमेटी की एक भी बैठक नहीं हुई। मनोनीत सदस्यों का कार्य भी प्रोसेस में है और बैठक की कोई तारीख भी तय नहीं है।