अंबाला सिटी। किसानों के आक्रोश ने हरियाणा और पंजाब सहित अन्य राज्यों में केंद्र सरकार के खिलाफ एक माहौल बनाने का काम किया। अंत तक किसानों ने वीडियो संदेश जारी कर लोगों को इशारे दिए। इसका परिणाम यह हुआ कि ग्रामीण क्षेत्रों में भाजपा सरकार को काफी नुकसान हुआ।
हरियाणा की सीटों पर भी इसका प्रभाव देखने को मिला। अब इस जनमत से किसानों के चेहरे खिले दिख रहे हैं। हालांकि किसानों की आगामी रणनीति क्या होगी इस पर अभी असमंजस बना हुआ है। किसान नेताओं का कहना है कि सरकार के गठन के बाद ही वह बैठक करेंगे और अपने निर्णय लेंगे। संभवत: वीरवार को दोनों मोर्चों के किसान नेता इस पर मंथन के लिए एक बैठक कर सकते हैं। दूसरी तरफ बुधवार को विश्व पर्यावरण दिवस पर किसानों ने कृषि से संबंधित किसी भी गतिविधि से वायु प्रदूषण को कम करने और गांवों में अधिक पेड़ लगाने का संकल्प लिया। किसानों ने केंद्र और राज्य सरकारों से जल और वायु प्रदूषण को कम करने के लिए अपने प्रयास बढ़ाने की अपील की।
किसानों ने इस तथ्य की ओर भी ध्यान दिलाया कि बड़े शहरों, विशेष रूप से महानगरों ने अपने निवासियों की वाहन क्षमता को पार कर लिया है, और इस प्रकार वे जल और वायु प्रदूषण दोनों में अधिक योगदान दे रहे हैं। उदाहरण के लिए, हरियाणा, पंजाब और पश्चिमी यूपी की कृषि भूमि और आबादी साल भर दिल्ली की ओर से उत्पन्न वायु प्रदूषण का खामियाजा भुगत रही है।
यही बात दिल्ली की ओर से यमुना में छोड़े गए सीवर और हरियाणा और यूपी में नीचे की ओर बहने वाले सीवर के लिए भी सच है। लेकिन, नैरेटिव इस तरह से सेट किया गया है कि पंजाब, हरियाणा और यूपी जैसे राज्यों को एक बड़े खलनायक के रूप में दिखाया गया है। वायु प्रदूषण के संबंध में, विभिन्न तकनीकी अध्ययन, केवल पराली जलाने और दिल्ली पर इसके प्रभाव पर केंद्रित है। यह प्रदूषण की समस्या की एकतरफा प्रस्तुति है जो पड़ोसी राज्यों के प्रति पक्षपातपूर्ण है।
हम मांग करते हैं कि दिल्ली जैसे महानगरों द्वारा उत्पन्न वायु प्रदूषण की मात्रा और पड़ोसी राज्यों पर इसके प्रभाव की गणना के लिए एक तकनीकी अध्ययन शुरू किया जाए। सही कदम उठाने के लिए, इन राज्यों की आबादी को प्रदूषण से निजात दिलाने के लिए सच्चाई सामने आनी चाहिए। पौधारोपण के इस अवसर पर अमरजीत मोहड़ी, अध्यक्ष, बीकेयू (शहीद भगत सिंह) एवं दिल्ली से आए पर्यावरणविद एवं जल प्रहरी पुरस्कृत दीवान सिंह भी मौजूद रहे।
किसानों ने इस तथ्य की ओर भी ध्यान दिलाया कि बड़े शहरों, विशेष रूप से महानगरों ने अपने निवासियों की वाहन क्षमता को पार कर लिया है, और इस प्रकार वे जल और वायु प्रदूषण दोनों में अधिक योगदान दे रहे हैं। उदाहरण के लिए, हरियाणा, पंजाब और पश्चिमी यूपी की कृषि भूमि और आबादी साल भर दिल्ली द्वारा उत्पन्न वायु प्रदूषण का खामियाजा भुगत रही है। यही बात दिल्ली द्वारा यमुना में छोड़े गए सीवेज और हरियाणा और यूपी में नीचे की ओर बहने वाले सीवेज के लिए भी सच है। लेकिन, नैरेटिव इस तरह से सेट किया गया है कि पंजाब, हरियाणा और यूपी जैसे राज्यों को एक बड़े खलनायक के रूप में दिखाया गया है। वायु प्रदूषण के संबंध में, विभिन्न तकनीकी अध्ययन, केवल पराली जलाने और दिल्ली पर इसके प्रभाव पर केंद्रित है।
यह प्रदूषण की समस्या की एकतरफा प्रस्तुति है जो पड़ोसी राज्यों के प्रति पक्षपातपूर्ण है। हम मांग करते हैं कि दिल्ली जैसे महानगरों द्वारा उत्पन्न वायु प्रदूषण की मात्रा और पड़ोसी राज्यों पर इसके प्रभाव की गणना के लिए एक तकनीकी अध्ययन शुरू किया जाए। सही कदम उठाने के लिए, इन राज्यों की आबादी को प्रदूषण से निजात दिलाने के लिए सच्चाई सामने आनी चाहिए। पौधारोपण के इस अवसर पर अमरजीत मोहड़ी, अध्यक्ष, बीकेयू (शहीद भगत सिंह) एवं दिल्ली से आए पर्यावरणविद एवं जल प्रहरी पुरस्कृत दीवान सिंह भी मौजूद रहे।