अंबाला सिटी। अंबाला सिटी के सेक्टर-7 स्थित श्री नीलकंठ महादेव मंदिर में चल रही श्रीराम चरित्रमानस रामायण पाठ की कथा में पहुंचे समाजसेवी संजीव जिंदल परिवार द्वारा पं. धर्मेद्र गौड व पं. त्रिलोचन शर्मा ने विधिवत मंत्रोच्चारण कर पूजन के कार्य संपन्न करवाए।
तत्पश्चात श्रीगणेश वंदना की स्तुती कर संगीतमयी श्रीराम चरित्रमानस रामायण पाठ की कथा का शुभारंभ कथा व्यास पं. भगवती प्रसाद पुरोहित ने किया। जहां कथा व्यास ने भगवान शिव शंकर पार्वती संवाद के दौरान भगवान श्रीराम के जन्म से संबंधित पार्वती के प्रश्नों पर श्रीराम जन्म क्यों हुआ विषय पर उनका अज्ञान दूर किया।
भगवान शिव ने कहा कि शेष, सरस्वती, वेद और पुराण भी उनके गुण गाते हैं। जो साधु संत मुनि हैं, वो उन्हें अनादि ब्रह्म कहते हैं, इसलिए सदैव राम-राम ही जपते हैं।
इसी प्रसंग के संपूर्ण विस्तार में भगवान शिव ने कहा कि भगवान के अवतार लेने के पांच विशेष कारण रहे। पहला कारण था संत कुमारों का भगवान के पार्षदों को श्राप, जिस कारण उनको राक्षस योनि में जाना पड़ा और उनके उद्धार के लिए भगवान को अवतार लेना पड़ा। दूसरा कारण था जलंधर का उद्धार करने के लिए। भगवान ने छल से उसकी पत्नी वृंदा का सतीत्व भंग किया। जिसके कारण वृंदा ने भी भगवान को श्राप दिया कि आपको मनुष्य बनना पड़ेगा।
तीसरा भगवान के अवतार का कारण था नारद जी का श्राप। चौथा कारण मनु और शतरूपा को भगवान का वरदान रहा, कि प्रभु स्वयं उनके पुत्र बनके आएंगे और पांचवां कारण था राजा प्रतापभान, अरीमर्दन और धर्मरुचि को ऋषियों का श्राप। यह तीनों ही रावण, कुंभकर्ण और विभीषण बने, भगवान के अवतार के कई कारण हैं, लेकिन विशेष रूप से कहा जाए तो भगवान अपने भक्तों के लिए ही अवतार लेते हैं। कथा के समापन पर सभी भक्तों ने भगवान श्रीराम दरबार में प्रसाद ग्रहण किया।