अंबाला। वैध का ठप्पा हटने के बाद भी विकास के मामले में क्षेत्र पिछड़ा है। यह जानकारी बब्याल में पाॅवर हाउस के पास रहने वाले स्थानीय निवासियों ने दी।
शासन और प्रशासन को कोसते हुए कहा कि जिस क्षेत्र में पिछले लगभग पांच साल से सड़कें टूटी हैं और बिजली के खंभे बिजली गिरने की कगार पर हैं। खाली प्लाॅटों में झाड़ियां उगी हैं और नालियां गंदगी से अटी हैं। अगर इसे ही विकास कहते हैं तो फिर इससे अच्छे तो गांव हैं, जहां नालियां भी पक्की और सड़कें भी, लेकिन बदहाल हो रहे शहरी क्षेत्र की तरफ किसी का ध्यान नहीं है।
कागजों में वैध और अवैध का खेल खेला जा रहा है और हकीकत में मूलभूत सुविधाओं आमजन से कोसों दूर हैं। इसका खामियाजा स्थानीय निवासियों को भुगतना पड़ रहा है जो टूटी सड़कों पर जब भी गुजरते हैं तो प्रशासन और खुद को कोसते हैं कि ऐसी जगह पर ही क्यों घर बनाया, इससे अच्छे तो वह गांव में ही थे।
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पांच साल से टूटी सड़क : बृज
बृजभूषण का कहना है कि सड़क को टूटे पांच साल बीत चुके हैं जबकि यह प्रमुख सड़क है। इससे बनाने के लिए कई बार कागजों में प्रक्रिया चली, लेकिन वो सिरे नहीं चढ़ पाई। अब एक बार फिर सड़क पर बजरी व गटका डाला गया है, लेकिन इसे भी डाले एक माह से ऊपर का समय बीत गया है।
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कागजों में ही हुई वैध : कृष्ण
कृष्ण चंद का कहना है कि वैध और अवैध का खेल कागजों में ही चल रहा है, जबकि हकीकत में विकास की सौगात नहीं मिलती। अगर मिलती तो आज उनके क्षेत्र के ऐसे हालात न होते। हजारों की आबादी पांच साल बाद भी विकास की बाट जोह रही है। लेकिन कुछ नहीं हआ।
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गुरचरण सिंह ने कहा कि बिजली के टेढ़े खंभे, खाली क्षेत्र में पड़ी गंदगी और नालियों में गदंगी, अगर यही विकास की परिभाषा है तो फिर ये सही है, बावजूद इसके प्रशासन से कोई उम्मीद भी नहीं है। स्थानीय लोगों को हमेशा मूलभूत सुविधाओं की दरकार रहती है, अगर वो भी पूरी नहीं हो रही।
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हरपाल सिंह ने बताया कि जहां जरूरत नहीं हैं, वहां टाइल से निर्मित सड़क का निर्माण किया जा रहा है, हैरानी की बात है कि आबादी भी नहीं है और जहां सैकड़ों लोग बसते हैं, उस तरफ किसी का ध्यान नहीं है। पॉवर हाउस से टांगरी बांध तक जा रही सड़क को टूटे हुए कई साल बीत चुके हैं और उनके सिर के बाल भी काले से सफेद हो गए हैं, बावजूद इसके सड़क नहीं बनी।