अंबाला। मेरे साहिब मेरे साहिब कौन जाने गुन तेरे मेरे साहिब शब्द से महान गुरमत समागम का माहौल भक्तिमय हो गया। दिल्ली से आए भाई चमनजीत सिंह लाल ने संगत को नाम सिमरण से जोड़ा। पंथ प्रसिद्ध कीर्तनी जत्थे भाई मनप्रीत सिंह कानपुरी ने संसार समुंदे तार गोबिंदे सहित अन्य शब्दों का गायन किया।
इसे सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए। इसी प्रकार पटना साहिब से आए भाई सरबजीत सिंह ने धन-धन हमारे भाग शब्द का उच्चारण करके श्रद्धालुओं में भक्ति रस का संचार किया। वहीं सचखंड श्री दरबार साहिब अमृतसर से आए भाई शौकीन सिंह ने तेरेया भक्ता को बलिहारा और भाई शुभदीप सिंह ने आपे साजे आपे रंगे शब्द से गुरमत समागम में गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज से संबंंधित शब्द-कीर्तन सुनाकर निहाल किया। जबकि गुरुद्वारा श्री पंजोखरा साहिब से आए भाई सतनाम सिंह ने कथा-कीर्तन द्वारा गुरु महाराज द्वारा दिखाए गए मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया।
दो साै से अधिक सेवादारों ने निभाई जिम्मेदारी : अंबाला छावनी के गांधी मैदान में आयोजित 28वें गुरमत समागम के दौरान श्रद्धा का सैलाब देखने को मिला। छोटे बच्चों सहित बुजुर्ग, नौजवान व महिलाएं भी समागम में गुरु महाराज का आशीर्वाद लेने के लिए पहुंचे। सिखों के साथ हिंदू भाईचारे ने भी समागम में बढ़चढ़कर पूरी श्रद्धा व निष्ठा से भाग लिया और समागम में पूर्ण सहयोग दिया। इस मौके पर लगभग 50 हजार स अधिक श्रद्धालुओं ने गुरु चरणों में माथा टेका और शीश नवाकर गुरु महाराज का आशीर्वाद प्राप्त किया। समागम में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 200 से अधिक सेवादारों को जिम्मेदारी सौंपी गई थी।