अंबाला सिटी। पंचकूला के जंगलों में एक नवजात बच्ची की मौत पर संज्ञान लेते हुए हरियाणा महिला और बाल विकास विभाग की आयुक्त और सचिव अमनीत पी कुमार ने जागरूकता फैलाने के निर्देश दिए।
जिला बाल संरक्षण अधिकारी ममता रानी ने बताया कि जो परिवार या महिला किसी कारण से बच्चों को पालने में असमर्थ हैं या वह अनचाहा बच्ची या बच्चा है तो उसे वह बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश होकर सरेंडर कर सकते हैं। इसके लिए अलावा नवजात शिशु को सुरक्षित रूप से पालना शिशु रिसेप्शन सेंटर में दे सकते हैं। बच्चा देने वाले की जानकारी गुप्त रखी जाएगी।
अंबाला में भी आ चुके कई मामले
जिला अंबाला में कई मामले ऐसे हैं, जिनमें भ्रूण और नवजात के शव नदी, नाले और कूड़े के ढेर से मिले हैं। इनके बारे में अभी तक कोई जानकारी नहीं मिली है। इनमें से ही एक ही बच्चा विभाग को जीवित मिला है। इसे पालना शिशु रिसेप्शन सेंटर में भेजा है।
बाल कल्याण को सौंपे बच्चा
चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर और पुलिस हेल्पलाइन नंबर 1098 कार्यरत रहते हैं। चेयरपर्सन रंजीता सचदेवा ने बताया कि बहुत से ऐसे अभिभावक हैं, जिन्हें बच्चा गोद लेने के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन कर रखा है और उन्हें बच्चा मिलने में लगभग तीन वर्ष का समय लग जाता है। ऐसे में असमर्थ परिवार बच्चे को सम्मान पूर्वक बाल कल्याण समिति कार्यालय में सरेंडर करके या उसे पालना घर में रखकर उनके जीने का अधिकार सुनिश्चित कर सकते हैं।