महावीर पार्क में 27 साल बाद नगर निगम बोटिंग शुरू करने जा रहा है। मगर हालातों से ऐसा लग रहा है कि नगर निगम ने आंख बंद करके ये ठेका दिया है। अगर महाबीर पार्क में बोट चलीं तो बारिश में शहर की सड़कों में इतना जलभराव हो जाएगा कि यहां भी बोट चलेगी।
इसका खुलासा नगर निगम की मेयर के लिखे उस पत्र से होता है जो उन्होंने निगम आयुक्त को लिखा है। इस पत्र के आखिरी में महावीर पार्क का जिक्र है। इसमें महाबीर पार्क के तालाब में पानी के स्तर को अत्यधिक बताया है। उन्होंने पानी के स्तर को सात से आठ फुट कम करने की बात कही है। इसके बावजूद नगर निगम यहां पर बोटिंग कराने की तैयारी कर रहा है।
ऊंची कॉलोनियों का पानी आता है पार्क में
शहर हर बार बारिश के समय में ऊंचे इलाकों का पानी अक्सर प्राकृतिक तरीके से महावीर पार्क के तालाब में चला जाता है। जब यह तालाब भर जाता है तो पानी ओवरफ्लो होकर वार्ड छह, सात और आठ को जलमग्न करता है। ऐसे में पूर्व के समय में तालाब में बारिश से पहले ही जलस्तर को कम कर दिया जाता है। मगर अभी तक तालाब में काफी जल स्तर है। इसे छह से सात फुट तक कम करने जरूरत है। इसी दौरान नगर निगम प्रशासन ने बाेटिंग कराने का फैसला दे दिया है। अब यहां बोटिंग के लिए तालाब में पानी के स्तर की पर्याप्त व्यवस्था रखनी होगी। अगर पानी अत्यधिक रखा तो बारिश में ओवरफ्लो होने पर फिर से वार्ड छह सात और आठ के डूबने की संभावना दिखाई दे रही है। यही कारण है कि मेयर ने पत्र लिखकर जल्द से जल्द तालाब के पानी को कम करने का तर्क दिया है।
निकासी का प्रबंध नहीं किया तो शहर जलमग्न होगा
इसके साथ ही बोटिंग की शुरुआत होने वाली है। ऐसे में नगर निगम प्रशासन को परवाह ही नहीं है कि बिना प्लानिंग के शहर के पानी की निकासी का क्या प्रबंध होगा। क्योंकि बोटिंग के लिए अधिक पानी की आवश्यकता होगी। ऐसे में वह बोटिंग चलाएंगे या पानी कम कर शहर को जलमग्न होने से बचाएंगे। बोटिंग चलने से शहर के जलमग्न होने की पूरी संभावना बनी हुई है। ऐसा इसलिए भी क्योंकि अभी तक कई नाले बंद हैं। मेयर के सर्वे में इसका खुलासा हुआ है। वीं दूसरी तरफ बोटिंग चलाने की तैयारी हो रही है मगर तालाब में गंदगी अटी है।
वर्जन
महावीर पार्क के तालाब का पानी कम करने की जरूरत है। इसमें अत्यधिक पानी है। मेरे निरीक्षण में यह बात सामने आई थी। मैंने नगर निगम आयुक्त को पत्र लिखा है, जिससे कि पानी को कम कराया जा सके और बारिश आए तो पानी तालाब में छोड़ा जा सके। अन्यथा लोगों को सड़क पर बोटिंग करनी पड़ेगी।
-सैलजा सचदेवा, मेयर, नगर निगम, अंबाला।
मैं ट्रेनिंग पर दो दिन से बाहर था। मुझे तालाब में पानी के स्तर की जानकारी नहीं है। अंबाला लौटने के बाद स्थिति को देखूंगा ।
-सौरभ गोयल, एक्सईएन, नगर निगम