अंबाला सिटी। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के तहत अंबाला में स्वास्थ्य विभाग और पीजीआई मिलकर काम कर रहे हैं। देश के 21 जिलों में इस परियोजना पर कार्य चल रहा है। इसमें वह स्वास्थ्य केंद्रों पर सुविधाओं को परख रहे हैं।
अब इसी परियोजना के तहत यह टीम सुविधाओं के साथ-साथ बीमारियों का सर्वे करेगी। इस सर्वे में कुछ चयनित विशेष बीमारियों की सटीकता को देखेंगे। जैसे कौन सी बीमारी अधिक लोगों को प्रभावित कर रही है, उपचार में क्या परिवर्तन आ रहा है, बीमारी का स्तर क्या है आदि प्रश्नों के जवाब सर्वे में तलाशे जाएंगे। इसमें चिकित्सकों की क्षमता और सुविधाओं की गुणवत्ता का आंकलन किया जाएगा। इसकी रिपोर्ट निदेशालय को भेजी जाएगी।
वर्तमान में ये कर रहे काम
वर्तमान में पीजीआई की टीम जिला अंबाला के स्वास्थ्य केंद्रों का सर्वे करने में जुटी है। इसमें पीएचसी, सीएचसी और सब सेंटर भी शामिल हैं। यहां पर टीम के सदस्य जाकर मरीजों से बातचीत करते हैं और उन्हें मिलने वाली 20 प्रकार की सुविधाओं के बारे में सर्वे कर रही हैं। अगर किसी केंद्र पर सभी सुविधाएं नहीं मिल रही तो उसका कारण पता लगाया जा रहा है।
शहजादपुर और बराड़ा में बुरा हाल
टीम ने सर्वे में पाया कि शहजादपुर और बराड़ा के सब सेंटरों में सबसे अधिक कमियां पाई गई हैं। यहां पर अधिकतर केंद्रों में चिकित्सक नहीं है तो वहीं यहां पर मौजूद जन आरोग्य मंदिरों में एलटी और फार्मासिस्ट भी नहीं है। इस कारण लोगों को या तो सरकार अस्पताल का रुख करना पड़ता है। या फिर निजी अस्पतालों में पैसे देकर उपचार लेना पड़ता है। कई सब सेंटर ऐसे हैं जिनमें महिलाओं और मरीजों के लिए शौचालय भी नहीं है।
चंडीगढ़ से 13 कर्मचारी कर रहे सर्वे
आईसीएमआर प्रोजेक्ट के तहत पीजीआई से आई 13 कर्मचारियों की टीम सर्वे का कार्य कर रही है। यह टीम समय- समय पर निदेशालय को अपनी रिपोर्ट भेजेगी। इसके आधार पर सुविधाओं में सुधार किया जाएगा। फिलहाल जिले के सभी सेंटरों में एन्क्वास मान्यता का कार्यक्रम चलाया जा रहा है। जिसके साथ- साथ आईसीएमआर प्रोजेक्ट के तहत जो कमियां निकल रही हैं उन्हें भी दूर किया जाएगा।
वर्जन
आईसीएमआर प्रोजेक्ट में जो भी कमियां आ रही हैं। उन्हें पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है। जल्द ही विशेष मरीजों की जांच का सर्वे भी शुरू हो जाएगा।
-डॉ. सुखप्रीत सिंह, जिला नोडल अधिकारी आयुष आरोग्य मंदिर।