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Ambala News: गांवों की सैकड़ों एकड़ फसल जलमग्न, किसानों ने लिखा सीएम को पत्र

Fri, 22 Aug 2025 02:10 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
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बराड़ा के किसान ज्ञापन दिखाते हुए । संवाद - फोटो : Samvad
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बराड़ा। बराड़ा में बाहरी क्षेत्रों से आया पानी शहरी इलाके से होकर गांवों में चला गया है। जहां सैकड़ों एकड़ फसल जलमग्न हो गई हैै। परेशान किसानों ने इस संबंध में मुख्यमंत्री नायब सैनी को पत्र लिखकर पानी निकासी की गुहार लगाई है। इस मांग को लेकर कई गावों के किसान वीरवार को बराड़ा एसडीएम के पास पहुंचे।
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उन्होंने मुख्यमंत्री के नाम मांगपत्र सौंपा। गांव राजाखेड़़ी निवासी करमजीत सिंह सैनी ने बताया कि बराड़ा में बाहर से आने वाला पानी मौजगढ़ के रास्ते रेलवे लाइन के नीचे से होता हुआ सज्जन माजरी में जा रहा है। यहां से सड़क पर बनी दो पुलियों के नीचे से पानी तेजगति से दादुपुर होता हुआ राजोखेड़ी, सुभरी और उगाला में जा रहा है। उन्होंने बताया कि पानी का बहाव इतना तेज है कि इन गांवों के खेतों में पानी पूरी तरह भर चुका हैै, जिससे फसलें जलमग्न हो गई हैं, जो धान पहले लगाई गई थी, उसकी जड़ें गलनी शुरू हो चुकी हैं, जबकि बाद में लगाई गई धान पूरी तरह से पानी में डूब गई है।



किसानों ने बताया कि गन्ने की फसल भी खराब होने के कगार पर है। किसानों की दुर्दशा की ओर प्रशासन कोई ध्यान नहीं दे रहा है। बराड़ा से राजोखेड़ी तक सड़क पर कई पुलिया होती थी, जो बंद हो चुकी हैं, जिनसे पानी अन्य जगहों पर चला जाता था, लेकिन केवल दो पुलिया सज्जन माजरी के सामने चालू हालत में हैं जो बाढ़ का कारण बन रही हैं। उन्होंने मांग की कि अन्य पुलियों को भी खुलवाया जाए। प्रशासन जल्द से जल्द उनके खेतों से पानी निकासी का प्रबंध करे। इस अवसर पर जसवंत सैनी, फकीरचंद, करनैल, धर्मवीर सिंह, कुलविन्द्र, रामदत्त, संदीप कुमार, जसविन्द्र सिंह, जय कुमार समेत अन्य किसान मौजूद रहे।
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मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में किसानों ने कहा कि बराड़ा में पानी निकासी के लिए बैतल नाला था जो बराड़ा से होता हुआ मौजगढ़, राजोखेड़ी, सुभरी, उगाला, अब्दुल्लागढ़ होते हुए कुरुक्षेत्र जिले के गांवों में चला जाता था। इस नाले से बराड़ा का सारा बरसाती पानी आगे चला जाता था और बाढ़ की स्थिति नहीं बनती थी, लेकिन वर्ष 1965-66 में इस नाले को बंद कर दिया गया, जिसके कारण आज इन गांवों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है। इस नाले की दिशा उत्तर से दक्षिण की ओर है। बराड़ा के जिन गांवों में यह नाला अभी बचा है, उन गांवों का रिकॉर्ड तहसील में उपलब्ध है। उन्होंने सीएम से मांग की कि इस नाले को दोबारा खुलवाया जाए ताकि इस क्षेत्र में बाढ़ आदि की स्थिति पैदा न हो। किसानों ने कहा कि बराड़ा में कट रही अवैध कॉलोनियों के कारण भी जलभराव की यह स्थिति पैदा हो रही है।



किसानों ने कहा कि वह इन खेतों में दो बार धान की रोपाई कर चुके हैं। एक बार पहले लगाई थी तो पानी से खराब हो गई थी इसके बाद उन्होंने दोबारा रोपाई की, लेकिन इस बार भी पानी ने सब बर्बाद कर दिया। उन्होंने अधिकारियों से मौैके का निरीक्षण करने की मांग की, लेकिन शाम तक कोई भी अधिकारी खेतों का जायजा लेने नहीं पहुुंचा। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही खेतों से पानी निकासी का कोई प्रबंध नहीं किया तो वह दादुपुर के पास पुलिया के आगे मिट्टी डालकर उसे बंद कर देंगे।
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