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Ambala News: बदहाल पार्कों पर मानव अधिकार आयोग सख्त

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अंबाला। हरियाणा मानव अधिकार आयोग बदहाल पार्कों की मामले पर स्वत: संज्ञान लिया है। जिसमें अंबाला सिटी के शिवालिक कॉलोनी स्थित सार्वजनिक पार्कों की बेहद खराब स्थिति की ओर ध्यान आकर्षित किया गया है। शहर में पार्कों पर नगर निगम का ध्यान नहीं है।
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इसके लिए आयोग ने नगर निगम अंबाला के आयुक्त से 30 अप्रैल 2025 तक पार्कों की स्थिति, रखरखाव और भविष्य की योजनाओं पर एक विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। आयोग के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. पुनीत अरोड़ा ने बताया कि आयोग के इस आदेश का पालन नहीं की गई तो संबंधित अधिकारियों पर जांच और प्रशासनिक कार्यवाही की जा सकती है।

पार्कों का रखरखाव न कर पाना प्रशासनिक लापरवाही

अंबाला के कई सार्वजनिक पार्क पिछले 13 वर्षों से उपेक्षा का शिकार हैं, जबकि उनके रखरखाव के लिए बार-बार आश्वासन दिए गए। बजट भी आबंटित किया गया। इस मामले में आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति ललित बत्रा और सदस्य कुलदीप जैन एवं दीप भाटिया ने इस गंभीर स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक पार्क न केवल हरित क्षेत्रों के रूप में कार्य करते हैं, बल्कि नागरिकों के स्वास्थ्य, पर्यावरणीय संतुलन और सामाजिक समरसता के लिए भी आवश्यक है।
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अपने आदेश में आयोग ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक पार्कों का रखरखाव न कर पाना केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत नागरिकों के स्वच्छ और स्वस्थ पर्यावरण के अधिकार का उल्लंघन है। साथ ही, यह अनुच्छेद 48ए और अनुच्छेद 51ए (जी) का भी उल्लंघन है, जो राज्य और नागरिकों दोनों पर पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी डालते हैं।

पार्कों की बहाली के लिए यह कार्य अनिवार्य

आयोग ने एमसी मेहता बनाम कमलनाथ मामले और पब्लिक ट्रस्ट डॉक्ट्रिन का हवाला देते हुए कहा कि प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करना राज्य की कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी है। आयोग ने पार्कों की बहाली के लिए हरे-भरे पौधों और जैव विविधता का नियमित रखरखाव, ओपन जिम और फिटनेस उपकरण की स्थापना, सुरक्षित व समतल वॉकिंग/जॉगिंग ट्रैक, एलईडी लाइट्स व सुरक्षा उपाय, स्वच्छ पेयजल, शौचालय और कचरा निपटान सुविधाएं, बच्चों के लिए झूले, स्लाइड आदि को अनिवार्य बताया है। आयोग ने यह भी कहा कि उपेक्षित पार्क न केवल बेकार होते हैं, बल्कि वे स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं।
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